Shyam Das, Author at Saavan's Posts

जवानी हाय इठलाने लगी है

जवानी हाय इठलाने लगी है जुबां पे आह सी आने लगी है हमारी चाह भडका के अदाये तुफानी प्रीत भडकाने लगी है उठी है प्रीति अंग-अंग मे नशीली खिला के राग चहकाने लगी है हया ऊठा के रग-रग मे सदायें नवेली रीति दे जाने लगी है नई आहे दिखा के जोश लावे तुफां ताने जुबां पे गाने लगी हैं ✍ श्याम दास महंत✍ (दिनांक 19-06-2028) »

न करो चमन की बरबाद गलियां

✍🌹अंदाज 🌹✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे सुकून की डलियां माली हो तुम करो महसूस यहां समझो सृजन की सत्य पहेलियां मासूम वृक्ष लताएं हैं सव॔ धरोहर फैलने दो इनकी मंत्रमुग्ध लडियां संस्कार धरो प्रकृति का मान रखो धरती पे निखारों मानवीय कडिया... »

नूर हो तुम आफताब हो तुम

✍🌹(अंदाज) 🌹✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा ख्वाब हो तुम देख कर चढता है नशा मुझमे दिलकश नशीली शराब हो तुम हर दिन पल तुझको पढता हूं मै सुकून भरी मेरी किताब हो तुम ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -25-04-2018) »

उठ जाग मत थक हार इंसान तू

✍🌹(अंदाज )🌹✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ स्व पहचान कर रख धार इंसान तू तेरा कम॔ चरित्र गुण की हो पूजा अपना शौर्य सूर उबार इंसान तू विकृत परिवेश प्रथा हालात हटा बुध्दि शक्ति से कर वार इंसान तू ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻... »

घोर कलियुग है देख पाप प्रबल

✍🌹(अंदाज )🌹✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख बुध्दि मे नकल कपट भाव है अंतस मे रचा-बसा आचरण मे नाटक का देख अकल आपसी मेल मिलाप मे छुपा स्वाथं मानव मे चाल देख कुटिल सफल ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -26-04-2018) »

विषाक्त है आज परिवेश देख।

✍🌹(गीताज) 🌹✍ ———$—— ✍ विषाक्त है आज परिवेश देख। आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।। कण कण मे है गुस्सा आलम मे नव क्रोध है धरती कुम्हला रही क्षण मे चढा अवरोध है पल बना है द्रोही खाके ठेस देख। विषाक्त है आज परिवेश देख ।। नजारो मे अहम तीव्र बचनो मे झूठ फरेब चापलूसी चलन मे तेज रौब मे अकड ऐठ ऐब दिखावा काढ़े बैठा है भेष देख । विषाक्त है आज परिवेश देख ।। मानवता है पीड़ित इंसानियत है ... »

विष मय है आज देख परिवेश।

✍🌹(गीताज ) 🌹✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है विद्रोही खाके ठेस । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। नजारो मे अहम बचनो मे फरेब चापलूसी मे बैठा ठाठ अकड ऐठ ऐब घृणित मंजर काढ़े बैठा है भेष । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। मानवता है पीड़ित इंसानियत है बुझी मानव देख है वेबश ... »

न हताश रख न उदास रख

✍🌹 ( अंदाज ) 🌹✍ —–$—‘ ✍ न हताश रख न उदास रख जिंदगी मे बस तू आस रख प्रतिकूलता से न तू डर कभी हौसला जीवन मे खास रख असफता पल है निखार का निज पे हिम्मत विश्वास रख संघर्ष के बिना जीवन है अधूरा हर दिन एक अभिनव प्रयास रख जिंदगी का नाम है ईक अध्याय अपने अंदर बस तू इतिहास रख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -11-04-2018) »

जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए

✍🌹(अंदाज)🌹✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार जिंदा रखिए बुराईया कटुता है मन का कचरा मंशा मे शुद्धता सार जिंदा रखिए सबको मिले संसार की हर खुशी ऐसा सात्विक विचार जिंदा रखिए खुद से मिले इंसान को प्रसन्नता धारणा ऐसी बेशुमार जिंदा रखिए ✍ श्... »

विकराल बन तू महाकाल बन

✍🌹(अंदाज) 🌹✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता संस्कार रहे सुरक्षित सदा सौहार्द्र समन्वयक शुद्ब बहाल बन मानव की मानवता सम्मान बचा स्वयं उत्तर बन तू नही सवाल बन ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -06-04-2018 »

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