Shivam Singh, Author at Saavan's Posts

हँसो

हँसो, के मैं जहाँ जा रहा, वहां तुम्हारी सोच भी नहीं जाती | हँसो, के मेरी आँखें जो सपने संजोए हैं, तुम्हारी देख भी नहीं पाती | हँसो, तुम हँसो | हँसो, के तुम्हारे यार कई हैं मगर अकेला खड़ा हू मैं | हँसो, के तुम बहे जा रहे लहरों में मग़र उनसे लड़ा हूं मैं | हँसो, तुम हँसो | हँसो, के तुम्हें कोई गम नहीं और कितना रोता रहा हूं मैं | हँसो, के तुम कभी उठे ही नहीं और गिर गिर कर खड़ा होता रहा हूं मैं | हँसो... »