राही अंजाना, Author at Saavan's Posts

कुर्सी की चाहत बचपन ऐ दिल में सजाये बैठे हैं

कुर्सी की चाहत बचपन ऐ दिल में सजाये बैठे हैं

कुर्सी की चाहत बचपन ऐ दिल में सजाये बैठे हैं, शतरंज के सारे मोहरे अपनी मुट्ठी में दबाये बैठे हैं, इरादे किसी शीशे से साफ़ नज़र आते हैं के हम, ख़्वाबों की एक लम्बी फहरिस्त बनाये बैठे हैं।। राही (अंजाना) »

खुद्दारी

खुद्दारी

इतनी खुद्दारी थी मुझमें के भिखारी हो गया, हर रिश्ता जैसे मुझपर ही भारी हो गया, संबंधों की सारी फहरिस्त झूठी निकली, एक जानवर जब मेरे जीवन की सवारी हो गया॥ राही (अंजाना) »

वजीर

शतरंज की बिसात का वो मोहरा हूँ मैं, जो आखरी खाने पर पहुँच वजीर बन जाता है।। राही (अंजाना) »

डर

जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ, मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।। राही (अंजाना) »

सबूत

कोई गवाह कोई सबूत नहीं मिलेगा तुम्हें, मोहब्बत ख्वाबों में जो जवान हुई है मेरी ।। राही (अंजाना) »

कानून

कानून

किसी भी कानूनी दफा से बेख़ौफ़ हूँ मै, तेरी मोहब्बत ऐ हथकड़ी में कैद हूँ मैं।। राही (अंजाना) »

जंजीर

वक्त की जंज़ीर भला मुझे बांधेगी कैसे, मैं तो पानी हूँ पत्थर भी चीरे हैं मैने।। राही (अंजाना) »

ख़ामोशी

ख़ामोशी की कीमत एक दिन मुझे समझ तब आई, जब वो मुझसे कहती गई न हुई मेरी सुनवाई।। राही (अंजाना) »

जानवर

अपने ही अपनों को काटने को बैठे हैं, यहां इसांन जानवर से भी बड़े दांत लिए बैठे हैं।। राही (अंजाना ) »

Hole

A small hole can Sink a lofty boat in water, But a smart idea can float u on water…. Rahi »

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