राही अंजाना, Author at Saavan's Posts

मजबूरी

मजबूरियों से भरे कटोरे के चुल्लू भर पानी को देख, समन्दर भी हार कर एक दिन आंसुओं में डूब गया। राही अंजाना »

अलकें

उसकी आँखों में मेरी आँखें उतर कर भूल गईं, दिल ओ जिगर के पैमाने पे असर कर भूल गईं, गहरा समन्दर था ये गुमान टूट कर बिखर गया, उस रोज़ उसकी अलकों से सफर कर भूल गईं।। राही अंजाना »

सवाल

जो सवाल अभी तलक बना ही नहीं, शायद मैं जवाब उसी सवाल का हूँ।। राही अंजाना »

क़र्ज़

क़र्ज़ शायद पिछले जनम का चुकाना पड़ता है, इसीलिए नन्हें कन्धों को वजन उठाना पड़ता है। राही अंजाना »

सरहद के शहीद

वीर थे अधीर थे सरहद के जलते नीर थे, इस देश के लिए बने तर्कश के मानो तीर थे, भगतसिंह राज गुरु सहदेव ऐसे धीर थे, बारूद से भरे हुए ये जिद्दी मानव शरीर थे। इंकलाब से हिलाये दिए अंग्रेज चीर थे, स्वतंत्रता संग्राम में फूँके सहस्र शीष थे, इतिहास के पटल पे छोड़े स्वर्णिम प्रीत थे, तिरंगे में लिपटके बोले वन्दे मातरम् गीत थे।। राही अंजाना »

नारी

महिला दिवस शिव की शक्ति बनकर तूने हर क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे भरपूर भले सबको निरुत्तर कर दिखाया नारी, ममता के आँचल में मानुष को तूने प्रेम सिखाया नारी, आँख उठी जो तुझ पर तूने काली रूप दिखाया नारी, बेटा-बेटी के बीच पनपते फर्क को तूने मिटाया नारी, कन्धे से कन्धा मिला जग में सम्मान फिर पाया नारी... »

कागज़

कागज़ की सीढ़ी बनाकर चढ़ते नज़र आते हैं, जो पढ़ते हैं अक्सर वही बढ़ते नज़र आते हैं, किसी कलम की स्याही सा जिंदगी में चलने वाले, ख्वाबों को हकीकत का सच गढ़ते नज़र आते हैं।। राही अंजाना »

खुशियाँ

जहाँ कचरे के ढ़ेर में भी बच्चे खुशियाँ ढूंढ़ लेते हैं, वहीं कमज़र्फ दिल इसमें भी सुर्खियाँ ढूंढ़ लेते हैं।। राही अंजाना »

खुराक

तेरे ख्वाबों की दो ख़ुराक लेकर मैं, बरसों से मोहब्बत के बुखार में हूँ।। »

सच

क्या सच में तुम भूख के मायने जानते हो, या यूँही झूठ मूट के तुम आईने छानते हो।। राही अंजाना »

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