Savitri, Author at Saavan's Posts

कैशलेस

कैशलेस होने में हर्ज क्या है? फिर सोचा ये मर्ज क्या है? गौर किया तो कुछ तस्वीर यूँ उभरी। मेरे घर आने वाली वो अनजान वृद्धा , बाला जी से तानपूरा लेआने वालेभक्त। वो कभी कभी अँधे का हाथ पकड चलने वाली औरत। वो जबान ना होने से आव आव का शोर मचा , अपनी व्यथा कहने वाला मूक युवक। पीर बाबा की चद्दर चढाने अजमेर शरीफ जाने वाले। वो नाच गा पेट पालने वाले किन्नर। आती ही रहती है कोई ना कोई व्यथित चिंतित आत्मा, मै क... »

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है।

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है। दुनिया अपने हौसले से ,जमीं हुई है। खुशफहमी ना पाल कि नसीब से सब मिलेगा। कर्म करने से ही ये आसमाँ झूकेगा। लाख लगाओ फेरे ,मन्दिर, मस्जिद, चर्च ,गुरूद्वारे। कर्म के आगे, इन्साँ इन्हें भी बिसारे। समय के चक्र पर निशाना साध ले प्यारे , काश के फेर में पड,मत हाँफ दुलारे। हाय री किस्मत कह फिर रोएगा ,पछताएगा। एक बार ये समय जो हाथ से निकल जाएगा। जहाँ साहा इतने दिन,कुछ औ... »

आज हर शख्स गुमशुदा है ,बैंक के बाहर।

आज हर शख्स गुमशुदा है ,बैंक के बाहर।

कल कुछ अलग से अनुभव हुए बैंक के बाहर। कविता के माध्यम से करते हैं शेयर आपके साथ। आज हर शख्स गुमशुदा है ,बैंक के बाहर। छोड सब काम छूट्टे के जुगाड में लगा था। बैक का माहौल गमगीन नहीं, उत्सव सा हसीन था। हर शख्स हैसियत से मुक्त, छुट्टे की ताक में तल्लीन, लाइन में सब बराबर,ना अमीर ना गरीब। हिन्दू ना मुस्लिम,ब्राहमण ना अछूत। सब बस एक ही सूत्र में ,एक ही जनून। भेदभाव लेसमात्र नहीं,समसता उतरी जमीं , ऐसे ल... »

सदियों से रहा है सोने की चिडिया ये मेरा देश

सदियों से रहा है सोने की चिडिया ये मेरा देश , मुफलिस में फँसा जीवन कैसे सम्भाला जाएगा। भूख से बैचन हैं यहाँ इन्सान की आत्मा। जाने कब पेट में इक निवाला जाएगा। इक तरफ है रौशनी रंगिनियाँ महफिलें। कब तलक अभावग्रस्त जन यूँ सम्भाला जाएगा। नहीं पूछते गरीब कभी गरीबनवाज का वो दर, जहाँ मिटे तकलीफ वो उस दर पै जाएगा। होती नहीं कोई पहचान कभी किसी गरीब की , गरीब अपनी गरीबी से ही पहचाना जाएगा। आती नहीं बहार क्यू... »

दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए

दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए। कद्र हमसे ना हुई,जो जुदा इस तरह हुए। हमने भी तो कुछ ,ज्यादा नहीं माँगा था आपसे। इतना सा त्याग कर सके ना आप हमारे वास्ते। महफिल म़े कद्र हुई ना हमारे ज्जबात की। आँखों में आँसू जम गये जब बिछुडने की बात की। दिल में हुआ अँधेरा ,ना कोई रोशन चिराग था, तुम अपनी रहा चल दिये, हम राह देखते रहे। जब हँस रहे थे चाँद तारे खुले आकाश म़े, तब रो रही थी आँखे हमारी तुम्हारी याद में।... »

“जश्ने आजादी”

जश्ने आजादी का पल है,आओ खुशी मनाएँ। आसमान फहरे तिरंगा, जन गण मन हम गाएँ। कालिमा की बीती रातें ,आया नया सवेरा। प्रगति -पथ परआगे ,बढ रहा देश अब मेरा। अरूणदेव की नूतन किरणें ,नया सवेरा लाई। नयी रोशनी पाकर देखो ,कलियाँ भी मुस्काई। नहीं खैरात में मिली आजादी,खून बहाकर पाई है। खूली हवा में साँसें ले हम,लाखों ने जान गँवाई हैं। याद करो वो कहर की बातें ,दुश्मन ने जो ढहाया था। मित्रता का हाथ बडा,गुलाम हमें ब... »