saundaryanidhi1, Author at Saavan's Posts

पहला प्यार ?

वो है बेखबर, शायद न हो उसे खबर! कैसे हुआ ये इश्क़ मुझे न पता चला, इन दिनों इश्क़ इतने करीब से गुजरा की लगा बस हो गया। आते जाते उसे देख खुद में मुस्क़ुरती हूँ। पाने की चाह किसे है, बस उसे जी भर देखना चाहती हूँ। पहले तो जुबा ही बोलती थी, पर अब तो आंखे भी बोलने लगी है! ये आँखो की आँख मिचोली है, यू तो बहुत कुछ बोलती है मुझसे, पर जब तुम आते हो, तो पगली झुक सी जाती है। ये मन भी बड़ा चंचल है, दौड़ता रहता पल प... »

ऐ इंसान सम्भल जा

एक प्रश्न है मुझे, ये इंसान क्या हो गया है तुझे? क्यों कर रहा है ऐसे काम, जिससे हो रहे हो बदनाम। क्या हक़ है तुझे, कर रहा इस सृष्टि को नष्ट, ये इंसान होगा तुझे ही कष्ट। मैंने तम्हे बनया है श्रेष्ठ, ये इंसान न कर इतना कलेश। तुझे क्या लगता है ?? तुझसे चल रहा है यह संसार, ये मुर्ख इंसान कर थोड़ा विचार। तूने काट डाले सारे पौधे और पेड़, क्यों करता जा रहा है अधेड़। ख़त्म कर डाले तूने झील और नदिया, कहाँ गए वो... »

माँ

तुम शान थी मेरी , तुम मान थी मेरी , तुम अभिमान थी मेरी , इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी ! जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने , परिवार में बेटो के चाह में पागल , पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने ! बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई , पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई , मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही ! आज भी याद है माँ स्कूल का वो पह... »

वो साथ तेरा

हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे , पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे ! हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर, तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर! तो क्या हुआ तुम ने छोड़ दिया साथ मेरा , अब मान लिया मैने नहीं है मेरा सबेरा l गुज़र गए वो दिन गुज़र गए वो राते, कितनी प्यारी थी तेरी साथ की बरसाते l वो बारिश की बूँदे, वो शाम की चाय, जो लम्हे तेरे साथ बीतये! वो हाथ में हाथ डाल कर घूमना वो माथे पे तेरा चूम... »