Satyen Bhandari, Author at Saavan's Posts

आखिरी मुंसिफ

मैं भी देश के सम्मान को सबसे ऊपर समझता हूँ तो क्या हुआ कि साहित्यकारों की निंदा पर जुदा राय रखता हूँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हूँ पक्षधर स्त्री-सम्मान को रखता हूँ सबसे ऊपर मैं नहीं मानता उन्हें माओवादी नाइंसाफियों के जो होते हैं विरोधी मजदूर-किसानों की बात को जो उठाए वे क्यों विकास-विरोधी कहलाएं ? ना बात-बेबात पाकिस्तान को गालियां देता हूँ और ना देश के झंडे को ले जज्बाती ही होता हूँ नेहरू को गा... »