SACHIN SANSANWALL, Author at Saavan's Posts

ख्वाबों की बेवफाई

ख्वाबों की बेवफाई

हम तो ख्वाबों की चौखट पर बैठे थे , लेकर हसीन ख्वाब … प्यारी आँखों के परदे पर || ख्वाबों को ख्वाब बनाने , आया एक मुसाफिर , रख दिया ख्वाबों को , उसने जलती आग पर || कोशिश बहुत की , ख्वाबों की नमी जोड़ने की , पर मेरे ख्वाब भी मनचले निकले , चल दिए ……. सवार हो धुएं पर || अफ़सोस, धुआँ भी तो आग का है , ना उम्मीद है बादल की , ना ही उम्मीद है बारिश की , अब इस बंजर जमीं पर || उठ … चल दि... »

कच्ची पेंसिल

कच्ची पेंसिल

आज कल के महंगे बॉलपेन से , मेरी कच्ची पेंसिल अच्छी थी || बॉलपेन की रफ़्तार से , मेरी पेंसिल की धीमी लिखावट अच्छी थी || गलती पर रब्बर पेंसिल का साथ , होता गुरु शिष्ये का आभास || गुरु की डाट पर वो रब्बर से मिटाना , लिखे पर फिर से पेंसिल घुमाना , सिखने तक ये सब दोहराना , वो बचपन की सीख सच्ची थी || बॉलपेन के स्थाईत्व से , मेरे बचपन की हर गलती अच्छी थी || आज कल के महंगे बॉलपेन से , मेरी कच्ची पेंसिल अच्... »

आश

आश

बैठे है अकेले राह में, दिल में कोई आश है , घडी की बदलती सुइयो के _सही होने का इन्तजार है , कुछ कदम बढाने है ,और ये सुनसान राह पार है , फिर करवट हम भी बद्लेगे ,क्योकि …. राह के पार खुशहाल संसार है , किसी के हाथो में हाथ है , तो कही भरा पूरा परिवार है !    – सचिन सनसनवाल »

किस्मत की नाव

किस्मत की नाव

चढ़ती लहरो को पार ना पाये किस्मत की मेरी नाव है कैसी ||   पुकारे तो नाम में सच पाये झूठी ले रहे ये सांस है कैसी || सपनो की तरंग पनप ना पाये मंजिलो की ये उलझन कैसी ||   मौत से जुड़ चल रही है जिन्दंगी मेरे अपनों की ये दुवाएं है कैसी || उमंग संग उड़ भी ना पाये आजादी की ये अंदरुनी सलाखें है कैसी ||   चढ़ती लहरो को पार ना पाये किस्मत की मेरी नाव है कैसी ||                   – सचिन सनसन... »

खोया शख्स

खोया शख्स

ढूंढने निकला हूँ एक शख्स को , जो खो गया है … मेरे भीड़ में खो जाने के बाद ! »

स्कूल वाले जूते

स्कूल वाले जूते

जब से लाहगी है चोगठ अपने शहर की , स्कूल वाले जूते याद आने लगे है।।  -सचिन सनसनवाल »

मन दोस्त माने ना !

मन दोस्त माने ना !

कुछ समय बाद बिछड़े दोस्तों से हम यु मिले , देख कर उनका नाम भी याद आया , रंग , रूप और उनकी दोस्ती का दाम भी याद आया , कभी गहरी दोस्ती थी उनसे हमारी, पर अब ये मन उनको दोस्त माने ना ! कुछ बाते कुछ मुलाकाते याद आई , मन ही मन आँखे भर आई , देख कर उनको आँखों को सुकून आया , आँखे ये हमारी उनको परिचित कहे , पर ये टुटा दिल उनको पहचाने ना ! आकर फिर से वही मीठा चुना लगाया , समझ गये झूठी वफा का तूफान आया , हमने ... »

मूर्खो का मुर्ख दिवस है आज

मूर्खो का मुर्ख दिवस है आज

मुर्ख बना मूर्खो को हो रहा नाज देखो मूर्खो का मुर्ख दिवस है आज || मूर्खो पर तुम भी थोड़ा हंस दो भाई मुर्ख हो दूसरों को मुर्ख बनने में लगे है भारतीय है पर पश्चिमी त्यौहार बनाने में लगे है ख़ुशी से अपना ही मखौल उड़ाने में लगे है ऐसे नादान है कुछ मुर्ख भारतीय भाई || आओ आज भुत में चलते है… इतिहास के  पन्ने पलटते है… पॉप ग्रेगरी नामक व्यक्ति था नकलची जिसने भारतीय पंचांग से पश्चिमी पंचांग बनाया... »

जिद्द है !

जिद्द है !

ना गजल ना ही तो गीत है जाल है बस शब्दों का , शब्दों से शुरू हो भीतर ही भीतर खुद से लड़ने की जिद्द है ! नही मानता कहानियों-कथाओं को बच्चा कलयुग का , परियों की कथाओं से मन के बच्चे को बहलाने की जिद्द है ! खुलीं-बंद आँखों से खोया रहता एक परिंदा सपनो का , हकीकत की हरयाली में परिंदे को लाने की जिद्द है ! चौराहों पर खड़ा रह भुलाया है वक़्त इन्तजार का , बन मुसाफिर नयी दिशाओ में जाने की जिद्द है ! सब कुछ छुप... »

मोहब्बत

तुम भी बेवक्त चले हो घर अपने,  जब हमने शहादत के स्मारक पर मोहब्बत लिख दी है || ~सचिन सनसनवाल »

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