Rohan, Author at Saavan's Posts

कविता:- सफर

जीवन के इस सफ़र में प्रकृति ही है जीवन हमारा, बढ़ती हुई आबादी में किंतु हर मनुष्य फिर रहा मारा-मारा॥ मनुष्य इसको नष्ट कर रहा है जिंदगी अपनी भ्रष्ट कर रहा है, करके नशा देता भाषण क्या नहीं जानता नशा नाश का कारण॥ मान प्रतिष्ठा या चाहे हो शोहरत है निर्भर सब धन दौलत पर, मान प्रतिष्ठा चाहे हो शोहरत है निर्भर सब धन दौलत पर, बनकर ब्रहमचारी सामने इस जग के निगाहें रखता हर औरत पर॥ हर प्राणी ईश्वर की रचना फिर... »

कविता:- अक्सर भूल जाता हूं मैं!!

वो दूसरों की गलती वो दूसरों पर एहसान चाहे मिले बेइज़्जती या मिले सम्मान वो दर्द का आलम वो प्रेमिका की बेवफाई वो उससे मिला धोखा या फिर लंबी जुदाई अक्सर भूल जाता हूं मैं, अक्सर भूल जाता हूं मैं। वो दुश्मनों का वार चाहे मित्र निकले गद्दार वो उनकी कुटिल हंसी या दिखावे का प्यार वो मेरे चाहने वाले बने आस्तीन का सांप हरकतों में उनकी मैंने ली थी जो गलती भांप अक्सर भूल जाता हूं मैं, अक्सर भूल जाता हूं मैं।... »

सोच, नए साल की.!.!

  क्या इस साल भी लड़ना है तुमको धर्म और जाति के नाम पर क्या इस साल भी लुटने देनी है लड़की की इज़्जत नीलाम पर क्या इस साल भी सोचा है तुमने फिर से घोटाले करने की क्या नहीं छोड़नी आदत वो गंदी दूसरों की कामयाबी से जलने की क्या इस साल भी तुमने सोचा है मां बाप को अपने ठुकराने का क्या इस साल भी तुमने सोचा है घर की बहुओं को जलाने का क्या इस साल भी तुमको करनी है बेटी की हत्या गर्भ में क्या अब और भी तु... »