Rita Arora, Author at Saavan's Posts

तुम्हारे सब चाहने वाले मिलकर

तुम्हारे👈🏻सब चाहने वाले मिलकर भी उतना 🙅🏻नही चाह सकते😘तुंम्हे जितनी मुहोब्बत ❤मै अकेली☝🏻करती हूँ 👩🏻तुमसे👈🏻😘💞❤ »

अब कल क्या लिखूंगी मै यही सोच के

अब कल क्या लिखूंगी मै यही सोच के डर जाती हूं ,,,,,,, फिर नये गमो से वास्ता होगा इसी उम्मीद में हर रात मै पुराने दर्द का कफ़न ओढ़ क्र सो जाती हूँ🎤®® »

मेरे प्यार को मुझे से चुरा लिया किसी

मेरे प्यार को मुझे से चुरा लिया किसी और ने 🎤 ख्वाब मैने देखा था मगर उसको हकीकत बना लिया किसी और ने,,,,® »

क्रोध की अग्नि में तपकर गरम हुआ दिमाग

क्रोध की अग्नि में तपकर गरम हुआ दिमाग ठंडी को भूल बरफ से शीतल किया दिमाग क्रोध ठिकाने लग गया ठंडे पड़ गये आज । रीता जयहिंद 🇮🇳🤑😄😪😍😀😃😝😡😣😍🤑🤑😎 »

आँखों से गमों की बारिश में छाता

आँखों से गमों की बारिश में छाता लेकर ज्यों ही घर से निकले हम राह में कुछ लोगों को कहते सुना अच्छे दिन आयेंगे बारिश थम गयी 🌿🌴रीता जयहिंद 🇮🇳🌴🌿☔❤की🖍से💐 »

नारी के प्रति पुरुष की सोच

विषय – नारी के प्रति पुरुष की सोच लेख – रीता जयहिंद ✍🏽 पुरातन समय में पुरुष की सोच नारी के प्रति सिर्फ घर के कामकाज और सिलाई, कढ़ाई, बुनाई वगैरह तक सीमित थी । छोटी उम्र में विवाह कर दिया जाता था ।नारी को पुरुष की द्रष्टि में मात्र संभोग की वस्तु समझा जाता था । और पढ़ाई – लिखाई नाम मात्र ही कराई जाती थी ।जिसके फलस्वरूप नारी यानी स्त्रियाँ अपने पैरों पर खड़ी होने में सक्षम नहीं हो ... »

Rita arora jai hind

चांदनी की चादर ओढ खुले आकाश के तले चांद तारों से बातें कर मस्त पवन के झोंको से सारी दुनिया से बेखबर जाने कब सो जाती हूँ 🇮🇳 रीता जयहिंद 🇮🇳 🌟🌙✨ शुभ रात्रि ✨🌙⭐ »

Rita arora jai hind

नर्म घास का बिछोना बिछा ख्वाहिशे कम कर नीलगगन1 की छत तले सुकून पूर्वक सो जाता हूँ शुभ – रात्रि रीता जयहिंद 🇮🇳 🌿🌟🌙⭐✨☔🌟💫🌿 »

Rita arora jai hind

ख्वाबों को अँखियन में संजोकर पलकों की चिलमन को गिराकर उजाले को कुछ कम तुम करके गुरु जनों का सिमरन तुम करके नींद के आलिंगन में जकड़ कर बजरंग बली का जाप कर सो जाना 🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹 🇮🇳 शुभ रात्रि 🇮🇳 रीता जयहिंद »

Rita arora jai hind

चलो उस पार चलते हैं जहाँ गमों की धूप नहीं सुख के ताने बाने है रजाई में दुबक कर नींद के आगोश में खोकर सपने नये सजाने हैं 🇮🇳 शुभ रात्रि 🇮🇳 जयहिंद »

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