Rishabh, Author at Saavan's Posts

तिरंगा

ना बिलखे भूख से ना कोई बच्चा नंगा रहे ना हो आतंक के साये ना कहीं कोई दंगा रहे मेरे भारत में चहुँ ओर बस प्रेम की गंगा बहे “आदि” का हो अन्त तब उसका कफ़न तिरंगा रहे जय हिन्द ! जय भारत ! ऋषभ जैन “आदि” »

कश्मीर जरुरी है

कश्मीर जरुरी है

पितरों के तर्पण को जैसे, थाली में खीर जरुरी है, भारत माँ के श्रृंगार को वैसे, ही कश्मीर जरुरी है| चमकी थी जो सत्तावन में, अब वो तलवार जरुरी है, प्यार मोह्हबत बहुत हो गया, अब तो वार जरुरी है |   खूब बहा लिया लहू सीमा पर, भारत माँ के लालों ने, जागो नींद से देशवासियों अब, इक हुंकार जरुरी है| भेद ना पाए दुश्मन सीमा को, ऐसी पतवार जरुरी है, और देश के गद्दारों को अब, दुत्कार जरुरी है |   ऋषभ जै... »

नारी

नारी

कभी श्रापित अहिल्या सी पत्थर बन जाती है कभी हरण होकर सीता सी बियोग पाती है कभी भरी सभा में अपमानित की जाती है कभी बेआबरू कर अस्मत लूटी जाती है कभी बाबुल की पगड़ी के मान के खातिर अपने सारे अरमानो की अर्थी सजाती है कभी सावित्री सी पति के प्राण के खातिर बिना समझे बिना बुझे यम से लड़ जाती है कभी कर्त्तव्यविमूढ पन्ना धाय बन जाती है कैसी भी हो बिपदा कैसा भी संकट हो अपने परिवार की ढाल बन जाती है ये नारी शक... »