Ranjit Tiwari, Author at Saavan's Posts

द्वय–वय–जीवन उत्कृष्ट विभूषित

हृदय–पटल पर नृत्यमय नुपुर झनक से झंकृत हूँ विस्मित मैं मधु-स्वर से विह्वल अभिराम को आह्लादित तिमिर अंतस को कर धवल— कनक–खनक करके उज्जवल सारंग–सा हो भाव प्रज्जवलित सोम–सुधा सा रुप लक्षित दृग–कामना भी छलक रही— पलक पर व्याकुलता थिरक रही विधु–विनोद–अनुराग मिश्रित गुण–प्रभा इला चंचला सुसज्जित प्रखर–सौन्दर्य अपूर्व–अनुपम आलिंगन को प्... »

ज़िन्दगी……|

है ज़िन्दगी कहीं हर्ष,कहीं संघर्ष कभी दुःखों की अवनति,कभी खुशियों का उत्कर्ष ऐश्वर्य है ज़िन्दगी,कहीं है ज़िन्दगी परिश्रम ज़िन्दगी का अर्थ लगाना ही–है मन का भ्रम कहीं ज़िन्दगी बन जाती प्यार,कहीं नफ़रत मानवता का पर्याय कभी-सत्संगों की चाहत आशा की पूनम रात ,कभी निराशा की अंधियारी भावनाओं की बहार है ज़िन्दगी ,कभी अकेली बेचारी कठिनाईयों की दीवार ,कभी परेशानियोंकी पहाड़ शीतल छाया, कभी बसंत,कभी पत... »

तेरे संघर्ष की लड़ाई

—————————- यूँ थककर ना बैठ मुसाफ़िर अभी तेरी मंज़िल नहीं आई शायद–चलेगी कुछ देर और तेरे संघर्ष की लड़ाई………. थककर यूँ बैठ गए अगर— राहे भी आसान ना होगी ज़मानें की रुसवाईयाँ भी– राहों की पहचान ना होगी वक़्त का पहिया घूम रहा घर्र-घर्र सच्चाई–अच्छाई से मेहनत सजकर क़दम हो अगर बिश्वास भरा— मंज़िल तुम्हें ... »

सवालों के अंगारे

———————– धधक रहा है मन में सवालों के अंगारे— सच है कौन-?झुठ है क्या-? मन में जो भ्रम पल रहे, या, आँखों से दिखते नज़ारे किस क़दर समझुँ– और, क्या समझाऊँ दिल को या, तन्हा जानुँ महफ़िल को–? क्या सोचती दुनियाँ– और,क्या बोलती बोलियाँ कौन जुड़े हैं दिल से– कितनें जुटे मुश्किल से क्या कहूँ–बहते नीर से या,शिक़वा तक़दीर से&#... »

मैं ही रहूँगा…..

——————— तेरे दिल में याद बनकर समा जाऊँगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊँगा कशिश की सरहद से दूर ना जा पाओग मैं खुशबू बनकर एहसास की———– ———–तेरी साँसों में घुल जाऊँगा ये तो सांसारिक बातेें हैं, कि….. मैं तुम्हारा रहा नहीं कभी– लेकिन— ख़्वाबों–ख़्यालों से छुड़ाओगे तुम पीछा कैसे—-? &... »

श्रृंगार की रचना

सारे सितम भुल जाऊँ इतना प्यार देना मुझे हर जख़्म भुल जाऊँ इतना प्यार देना मुझे तेरा एतबार औरों से ज़ुदा है निगाहों में उम्मीद तु दिल से ख़ुदा है मुस्कुराना थोड़ा सीख जाऊँ इतनी हँसी देना मुझे तेरे आग़ोश में मिल जाएँगे रत्न सारे सागर के तेरा भरोसा ही पतवार जैसा पार करेगा मुझे– तेरी संतात्वना ही संजीवनी जी पाऊँगा जी भर के सारे दर्द को सह जाऊँ इतना इक़रार देना मुझे सारे जख़्म भुल जाऊँ इतना प्यार... »

अब तो संभलो

स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं रहें हैं , आज महंगाई से मामला ग़मग़ीन है……!! औपचारिकता के रोग लगें हैं- हर लोग यहाँ बीमार हैं डॉक्टर भी पड़ा है शय्या पर- अपनें-अपनें दर्द में लीन हैं……... »

Kaisaa safar– kis manzil mei..!

————————————————- Imaan ka daawaa kar sakte nhi Beimaano ki mehfil mei Lakh chaho mumkin nhi taraqqi Gandagi gr man mei-kapat dil mei Har surat ab dikhaawey ka– Seerat bhi dhumil ho gayi hai Saboot-saboot ke chakkar mei– Bechari sachchai parri musqil mei Vaachaal ho gyi duniyaan– Bishw... »

Kaisa hoga apna Hindustan….!!

Suno–sunaai degi tumhe– Bharat maa ki chittkaar Lahoo bahe– jo mere beto ke Kyu hota ja rahaa bekaar…?? Shahaadat mere laal ki Chup pattharro mei simat gyi hai Mujhpar mar mitna mere bachcho ka– Kyu sirf kahaani bankar rah gyi hai.?? Kya sochkar wey hue the qurban Ki-Aisa ho jayega apna Hindustan…..??? Raajneeti ki bayaare—- Dishaaheen bahaa karengi…... »

Chand panktiyaa

Duniyaa bhar ki khushiya hain Prr,mere hotho pe muskan nhi Naam jitnaa bhi baraa ho mera Tum bin koi pehchaan nhi Tarrapte dil ki aawaz to suno Tumse pyar mangaa hai,ehsaan nhi Sawar jayegi zindgani-tumhe pataa hai Aitbaar tera chaahiye–ye jahaan nhi Phirr to muskuraane lgrnge gam-e-ranjit Khushgawaar saath tera ho–ye zami aasamaan nhi….. –Ranjit Tiwari “Munna” »

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