Ranjit Tiwari, Author at Saavan's Posts

रंग क्या होंगे

रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के रंग क्या होंगे—? फ़सानें-अफ़सानें हज़ार बातें मुद्दों का मसला नज़र नहीं आता किसलिए ये भागमभाग है मची कोई फ़ैसला नज़र नहीं... »

नवविवाहिता का पति को भाव–समर्पण…….

मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन ————————————– मेरा सजने को है जीवन–आँगन मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन… भाव–विभोर मेरे नैनन में स्वप्न ने ली अँगड़ाई है- जो लिखी विधाता के.हाथों– उस परम्परा की अगुवाई है खिलने वाला है नव उपवन—- मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन बहुपुष्प सुगंधित सा मन अनुभूति–जैसे हरित... »

वादियाँ मुस्कुराऐंगी…..|

——————————– कहतें हैं-बदलाव प्रकृति का नियम है तभी तो, बदलता रहता मौसम है सिलसिला बदलाव का प्रखर हो चुका बेहतर से बदत्तर और भी बदत्तर हो चुका प्रेम नफ़रत बन गया— दिखावटी भाव की मेहरबानी है पहले औरों की परेशानी थी– अब अपनों से खींचातानी है मुश्किल पहचान बन गए इंसान हैवान बन गए नज़ारे बहारों के श्मशान हो गए हर कोई एक-दूजे ... »

क्या रखा है–?संसार के विकार में

—————-–————————— दुनियादारी के बाज़ार में फँस गए हम व्यापार में लाभ-हानि में हुई बेवकुफियाँ मान-हानि भी व्यवहार में नज़र-नज़र की बात निराली नज़र ने नज़र से हर बात कह डाली नज़र की नज़र से हुई तक़रार भी नज़र फिर भी नज़र.के इंतजार में दिल और ज़ुबाँ की हाथापाई हालात ज़ुबाँ के हाथ आई कसक-दिल की छटपटाहट कौन जानें दिल फिर भी ज़ुबाँ के... »

रंग क्या होंगे—?

  लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के रंग क्या होंगे—? फ़सानें-अफ़सानें हज़ार बातें मुद्दों का मसला नज़र नहीं आता किसलिए ये भागमभाग है मची कोई फ़ैसला नज़र नहीं आता तो,समय के रंग क्या होंगे—? ज़िन्दग़ानी ऐसी,सबब क्या– वक़्त म... »

द्वय–वय–जीवन उत्कृष्ट विभूषित

हृदय–पटल पर नृत्यमय नुपुर झनक से झंकृत हूँ विस्मित मैं मधु-स्वर से विह्वल अभिराम को आह्लादित तिमिर अंतस को कर धवल— कनक–खनक करके उज्जवल सारंग–सा हो भाव प्रज्जवलित सोम–सुधा सा रुप लक्षित दृग–कामना भी छलक रही— पलक पर व्याकुलता थिरक रही विधु–विनोद–अनुराग मिश्रित गुण–प्रभा इला चंचला सुसज्जित प्रखर–सौन्दर्य अपूर्व–अनुपम आलिंगन को प्... »

ज़िन्दगी……|

है ज़िन्दगी कहीं हर्ष,कहीं संघर्ष कभी दुःखों की अवनति,कभी खुशियों का उत्कर्ष ऐश्वर्य है ज़िन्दगी,कहीं है ज़िन्दगी परिश्रम ज़िन्दगी का अर्थ लगाना ही–है मन का भ्रम कहीं ज़िन्दगी बन जाती प्यार,कहीं नफ़रत मानवता का पर्याय कभी-सत्संगों की चाहत आशा की पूनम रात ,कभी निराशा की अंधियारी भावनाओं की बहार है ज़िन्दगी ,कभी अकेली बेचारी कठिनाईयों की दीवार ,कभी परेशानियोंकी पहाड़ शीतल छाया, कभी बसंत,कभी पत... »

तेरे संघर्ष की लड़ाई

—————————- यूँ थककर ना बैठ मुसाफ़िर अभी तेरी मंज़िल नहीं आई शायद–चलेगी कुछ देर और तेरे संघर्ष की लड़ाई………. थककर यूँ बैठ गए अगर— राहे भी आसान ना होगी ज़मानें की रुसवाईयाँ भी– राहों की पहचान ना होगी वक़्त का पहिया घूम रहा घर्र-घर्र सच्चाई–अच्छाई से मेहनत सजकर क़दम हो अगर बिश्वास भरा— मंज़िल तुम्हें ... »

सवालों के अंगारे

———————– धधक रहा है मन में सवालों के अंगारे— सच है कौन-?झुठ है क्या-? मन में जो भ्रम पल रहे, या, आँखों से दिखते नज़ारे किस क़दर समझुँ– और, क्या समझाऊँ दिल को या, तन्हा जानुँ महफ़िल को–? क्या सोचती दुनियाँ– और,क्या बोलती बोलियाँ कौन जुड़े हैं दिल से– कितनें जुटे मुश्किल से क्या कहूँ–बहते नीर से या,शिक़वा तक़दीर से&#... »

मैं ही रहूँगा…..

——————— तेरे दिल में याद बनकर समा जाऊँगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊँगा कशिश की सरहद से दूर ना जा पाओग मैं खुशबू बनकर एहसास की———– ———–तेरी साँसों में घुल जाऊँगा ये तो सांसारिक बातेें हैं, कि….. मैं तुम्हारा रहा नहीं कभी– लेकिन— ख़्वाबों–ख़्यालों से छुड़ाओगे तुम पीछा कैसे—-? &... »

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