Ranjit, Author at Saavan's Posts

कैसा होगा अपना हिंदुस्तान

कैसा होगा अपना हिंदुस्तान…! ————————————— सुनो..सुनाई देगी तुम्हें भारत माँ की चीत्कार लहू बहे जो मेरे बेटों के- क्यों होता जा रहा बेकार—? शहादत मेरे लाल की– चुप पत्थरों में सिमट गई है मुझपर मरना मेरे बच्चों का क्यों.सिर्फ कहानी बनकर रह गयी है क्या सोचकर वे हुए थे क़ुर्बान कि, ऐसा हो जाएगा अपना हिन्दुस्त... »

तन्हाई

बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी होठों पे मुस्कुराहट ने धाक जमाई हँसी आई, कहा मैंने तुम तो खुद हो तन्हाई फिर साथ कैसे..(?) जो खुद हो अकेला कैसे लगा सकता वो मेला हँसी लेकर होठों पे तन्हाई ने कहा बड़े प्यार से कौन साथ निभाता है यहाँ पे तन्हा आता है और तन्हा जाता है यहाँ से अर्थात, मेरे अलावा दूजा कोई साथी नहीं सभी दृश... »

कैसे होते हैं……!

कैसे होते हैं……! ——————————— कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै– वक़्त पर बदल जाए–इंसान कैसे होते हैं..! छोड़ दे साथ भँवर में-हमसफ़र कैसे होतें हैं सूना-सूना,तन्हा-तन्हा–सफ़र कैसे होते हैं यूँ तो दूनियाँ रास्ता है–आने-ज... »

भारतीय हो-भारतीय रहो

भारतीय हो-भारतीय रहो

भारतीय हो-भारतीय रहो ———————————- भारतीय हो–भारतीय रहो सर ऊँचा कर भारतीय कहो मिट्टी यहाँ की,संस्कृति यहाँ की संस्कारों में पली-बढ़ी है शक़्ल-ओ-सूरत मनुष्य एक सा फिर,क्यों—? सबको भेदभाव की पड़ी है व्यथित विचारों की तोड़ो बेड़ियां कौन सी अच्छाइयाँ है,इसमें न तुम खुश और हैरान भी मैं रोग विकारों का- स्वयं इलाज करो अपनी मातृभूमि प... »

अब तो संभलो…!

अब तो संभलो…! —————————- स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं रहें हैं , आज महंगाई से मामला ग़मग़ीन है……!! औपचारिकता के रोग लगें हैं- हर लोग... »

…..बढ़ रहा है क्यों–??

…..बढ़ रहा है क्यों–?? —————————- प्यार दिखता नही,नफ़रत घटती नहीं तक़रार का अंगार बढ़ रहा है क्यों…? इंसानियत मिलती नहीं,हैवानियत मिटती नहीं संस्कारों का बिखराव बढ़ रहा है क्यों..?? क्या चाहता मानव वर्तमान का– क्यों पर्याय बन चुका हैवान का कर रहा क्यों मानवता तार-तार व्यवहार को औपचारिकता बनाकर- आपसी टकराव बढ़ रहा है क्यों̷... »

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है —————————————- कोई एहसास दिल को छुआ है मुमकिन है,आपका आना हुआ है ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है सिसक रही तन्हाई भी हँस पड़ी नज़र को नज़र का नज़राना हुआ है तसल्ली ने दिया-दिल को यकीं- इंतज़ार में पलों का सताना हुआ है इज़हार को मचलने लगी क़शिश सूना जीवन सुहाना हुआ है ले... »

ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो

ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो ————————————— तेरे दिल में याद बनकर समां जाऊंगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊंगा क़शिश की सरहद से दूर ना जा पाओगे– मैं खुशबू बनकर एहसास की— —तेरी साँसों में घुल जाऊंगा ये तो सांसारिक बातें हैं,कि– मै तुम्हारा रहा नही कभी लेकिन— ख़्वाबों–खयालों से छुड़... »

नहीं थकती……।

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल जो “यादें”उस पल की-हँसते नही थकती हृदय विह्वल-पुनर्मिलन की चाह म... »

अश्क़

अश्क़ ———— बातों ही बातों में पलकों की दामन में- मोतियों से कुछ दिख पड़ते “अश्क़”हैं ये–बुलबुले अरमानों के कभी चहकती खुशियाँ कभी ख़्वाब लुटतें हैं चेहरे खिल जाते,कभी– भीग जाती पलकें हैं मुस्कुराते–कभी दहकते दिल हँसी कभी सिसकती महफ़िल एहसास की बात है, यारों– कहीं इनकार छलकाते कहीं इज़हार छलकते दास्तां इनकी अजीब है जुदा-जुदा नसीब है कभी भिगोते आं... »

Page 1 of 512345