Ramesh Singh, Author at Saavan's Posts

उसी का शहर था उसी की अदालत।

उसी का शहर था उसी की अदालत। वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।। , फिर होना था वो ही होता है अक्सर। हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।। , ये कैसा सहर है क्यू उजाला नहीं है। अब अंधेरों से कैसे करेंगें हिफ़ाजत।। , चिरागों का जलना आसान नहीं था। हवाओं ने रखा है उनको सलामत।। , तुमको फिक्र है न हमकों है फुरसत। न है कोई मसला न कोई शिकायत।। , साहिल भँवर में है जिंदा अभी तक। ये उसका करम है उसी की इनायत।। #रमेश »

इश्क़ करना बहुत आसान निभाना है बहुत मुश्किल।

इश्क़ करना बहुत आसान निभाना है बहुत मुश्किल। किसी ने पा लिया सब कुछ किसी को है नही मंजिल।। सफ़र में हम रहे तन्हा मिली तन्हाइयां हमको। नहीं अफ़सोस इसका है हुए जो हम नहीं कामिल।। @@@@RK@@@@   »

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना।

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना। वो तो था ही नही कभी रहगुज़र अपना।। , तुमको मुबारक हो भीड़ इस दुनिया की। हम काट लेंगे तन्हा ही ये सफर अपना।। , भूल गए हो यक़ीनन तुम अपने वादे सारे। पर उदास रहता है वो गवाह शज़र अपना।। , न कोई मुन्तज़िर है न है कोई आहट तेरी। फिर भी सजाता है कोई क्यू घर अपना।। , ऐ बादल बरसों ऐसे भीगों डालो सबकुछ। की साहिल जलता बहुत है ये शहर अपना। @@@@RK@@@@ »

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है! है अधूरी कहानी जख्म ही जख्म है !! . न तुमने कहा कुछ न हमने कहा कुछ! बढी फिर भी दूरी ये वहम ही वहम है‌‌‍!! . कहीं तिरगी है और कहीं तन्हा राते ! कहीं पर है महफिल जश्न ही जश्न है!! . न वक़्त तुमको मिला न हमको मिला! जो दिल मे थी बातें दफ्न की दफ्न है!! . सदिया है गुजरी ना है आहट ही कोइ! ना साहिल को ही कोई ‌रंज ओ गम है!! @@@@ RK@@@@   »

घर मेरा तुम्हें हवादार नहीं लगता।

घर मेरा तुम्हें हवादार नहीं लगता। मैने हकीकत कही तुम्हें असरदार नहीं लगता।। , कि कशती कहीं डूब न जाए सफर में मेरी। तुम दुआ करो तूफान मेरा तरफदार नहीं लगता।। , शक्ल से कहा हो पाएगा तुम्हें कुछ अंदाजा। मुसकुराता रहा हूँ जख्म है,पर बिमार नहीं लगता।। , और ढूँढना पड़ता है जिंदगी में इक इक लमहा। सच है कि खुशियों का कहीं बाजार नहीं लगता।। , वैसे तो खबरों की कोई कमी नहीं है इनमें। मगर क्या कहे साहिल ये अख... »

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों। मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।। , ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम। क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।। , ख़ुद मुज़रिम होके हमें गुनाहगार कह दिया। अपनी बेगुनाही के सबूत तो दिखाते हमको।। , अश्कों की वज़ह बनते है ख़त मेरे अक्सर। कहतें हो तो फ़िर क्यूँ नहीं जलातें हमकों।। , कहना आसान है ओ वादे भी तमाम होते है। पर क़ोई रिश्ता कहा था तो निभाते हमकों।। , जिसे भूलन... »

“जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें”

जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें। इक उम्र तो बस यूँ ही तमाम किया हमनें।। , पता नहीं किस ख़्वाहिश में दर ब दर हुए। न सुकून ही मिला न आराम किया हमनें।। , लिखें कई अधूरे अफ़साने क्यूँ मैंने खुद से। पढ़ के सोचतें है ये कोई काम किया हमनें।। , मिलने आती है मंजिलें ख़ुद हमसे अक्सर। उन्हें पता है रास्ते को मकाम किया हमने।। , ये क्या फिर वही साहिल फिर वही संमदर। चलों चले रोज़ की तरह शाम किया हमनें।। @@@@RK... »

“खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने”

खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने। तेरा न आना तय था इंतज़ार किया मैंने।। , जब थी फूलों सी फ़ितरत तो तोड़ा सबने। अब तोहमतें है खुद को ख़ार किया मैंने।। , मौसम मेरे मुताबिक़ कहाँ होने वाला था। नाहक ही हवाओं पे इख़्तियार किया मैंने।। , मुश्किले आती हैं दरिया की राह में अक्सर। जब मुझकों बहना था सब पार किया मैंने।। , वहम था की हम नहीं कहतें हाल ए दिल। जबकि लिख के सब अख़बार किया मैंने।। , जिसनें किया था बारह... »

जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।

जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है। जिंदगी का मज़ा अब सवालों में है।। , जो जाता है उसको चले जानें दो। देख लेंगे हम ग़म के जो प्यालों में है।। , तस्वीरों को तेरी मैं अब रखता नहीं। बस तेरा चेहरा अंधेरे उजालों में है।। , आँखों में मेरी है मंजिल ही मंजिल। फिर दर्द थोड़े न पैरो के छालों में है।। , मौसमो की तरह था जो बदलता रहा। चर्चा उसी की वफ़ा के मिसालों में है।। @@@@RK@@@@ »

“ख्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है”

ख़्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है। चेहरे देखा है उसका अलग आब है।। , जिसको कहतें रहे उम्र भर हम दवा। उसको सारा जहाँ कहता शराब है।। , खुद ही बदलें नहीं बस ये कहतें रहें। वक़्त है ये बुरा जमाना भी खराब है।। , हो ख़्वाहिश वो मिलें फिर न पूँछिये। ग़र न मिलें फिर जिंदगी अज़ाब है।। , हमनें जैसा किया हमकों वैसा मिला। क़ोई देखता है हमकों सब हिसाब है।। , हमकों ऐसे भुला दोंगे मालूम न था। जैसे इंसान नही साहिल किताब ... »

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