Ramesh Chander, Author at Saavan's Posts

बिगड़ना भी न इस कदर 

बिगड़ना भी न इस कदर चाहिये, खुद को परखने की बस नजर चाहिये.. पन्ने अखबार के बेसब्री से बदल डाले, सनसनी सी कोई खबर – चाहिये.. छोटे से घर में क्यो इश्क पनपता नही, बड़ा सा उसको भी क्या घर चाहिये.. ऊँची सबसे उडान हो चाहते- आसमॉ की, परिंदो से भी बेहतर उसे पर चाहिये.. रिश्ते भी पुख्ता होते वही है, अदाबतो में भी थोड़ा सा ड़र चाहिये.. लिखता बहुत पर वो कहता नही है, कहने के लिये बड़ा जिगर चाहिये इश्क म... »

मजा आ गया होली में

सभी मित्रोजनो को होली की अग्रिम शुभकामनाये। आप सबों को होली पर एक भेट! ****** प्रेम-रस का रंग बरसाने निकली भर के झोली में ! क्युँ मैं सखियों से बिछङी क्या आया रास अकेली में ताँक रहे थे पिया गली में। धर ले गए खींच दहेली में। हाथो को पकङा रंग गालो पर रगङा मूक रही कुछ न बोली मैं । हाथो को जोङा पैरो को पकङा सुनी एक न मेरी हमजोली ने। मनभावन मेल लता-तरु सा आहा! मजा आ गया होली में!? -रमेश जय राधे- कृष्ण&... »

काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए

काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए घटा-ए जुल्फ मैखाना वलवला-ए रंगे चश्म शराब हो गए!? -रमेश »