Ram, Author at Saavan's Posts

जब मैंने पूछा

जब मैंने पूछा – आज तुम्हारा बदन इतना मैला क्यों है क्यों हो तुम इतने गुस्से में, क्या कोई संताप है? उसने घूर कर देखा मुझे, और कहा आज कल तबीयत थोड़ा खराब है. ये सब तुम्हीं लोगों का किया धरा है, और पूछते हो, मुझे कोई संताप है? तुम करते धरती को गन्दा, जैसे सब कुछ तुम्हारे ही हाथ है। कहते कहते वह रोने सा लगा और बोला – हो जाओगे खाक सब, ग़र मैं नहीं होऊंगा क्या तुम्हारे नाश से, मैं चैन से सो... »

है अभी तूफान गर मेरी सफलता के पथ पर

है अभी तूफान गर मेरी सफलता के पथ पर पर अब नहीं रुक सकता मैं जो हो चुका हूँ अग्रसर हूँ पथिक ऐसा जो नहीं रुक सकता ऐसे हारकर अंधेरी रात है तो क्या हुआ सुबह भी होगी मगर माँ बाप को है गर्व मेरे होने के एहसास पर मुझसे कहीं ज्यादा भरोसा है उन्हें मेरी जीत पर कर नहीं सकता हूँ टुकड़े उनकी आशाओं का मैं अब करना तूफानों से दो-दो हाथ है डटकर ~राम शुक्ला कटरा बाज़ार, गोंडा उत्तर प्रदेश »

सर्दी गर्मी या वर्षा हो, चाहे अमावस रात हो

सर्दी गर्मी या वर्षा हो, चाहे अमावस रात हो हैं अडिग हर तूफानों में, चाहे पौष की ठंडी रात हो खड़े रहते हैं सरहद पर, चाहे गोली की बौछार हो मौत से होता है मिलन यूँ, कि जैसे गले का हार हो दुश्मनों के दल में जब वो, तांडव करते हैं हों सैकड़ों महाकाल वो, ऐसे लगते हैं कितना दुर्गम रास्ता हो, वो नहीं डरते हैं हैं नजर से पारखी वो, दुश्मनों पे नजर रखते हैं वो राम राज्य लाने को, रहते हैं सदा उतावले पर निज स्व... »

छलावा

संवेदनाएँ भी अपना अस्तित्व भूल गई हैं, शायद वेदनाएँ मुखौटा पहन कर मिली होंगी उनसे। »