Rahasya deoria, Author at Saavan's Posts

दिए मे जो बात ” रहस्य ” देवरिया

दिल में जो हैं ” रहस्य ” देवरिया गर है मोहब्बत तो जताते क्यों नही। दिल मे जो है बात बताते क्यों नही।। %%%% %%%% जरुरी नहीं हर बार तू रुठे मै मनाऊ। हमे कभी भी तूम मनाते क्यों नहीं।। %%%% %%%% साथ हर पल देते तुम्हारी हर जिद् मे। तूम हमारा रिश्ता निभाते क्यों नही।। %%%% %%% ” रहस्य ” देवरिया »

दिल की बातो पर उनको

दिल की बातो पर उनको एतबार नहीं होता। चाहे कुछ भी करले उन्हें हमसे प्यार नहीं होता।। एक हम हैं उन्हें याद हर पल करते रहते हैं। पर वो कहते बात करने का समय यार नहीं होता।। ” रहस्य ” देवरिया »

रुलाता भी नहीं और

रुलाता भी नहीं और खुश रहने भी नही देता। ख्वाबो मे आने का वादा कर सोने नही देता।। बड़े बे अदब और बेरहम है हमसफर मेरा। दर्द देता है हंस कर पर मरहम नहीं देता।। ” रहस्य ” देवरिया »

मिली मुझे खुशियां

मिली मुझे खुशियाँ (“रहस्य:) देवरिया मेरे होठों कि हॅशी तेरे आनें से है, मिली मुझे खुशीयाॅ तेरे बहाने से है,, “””””””” मेरे लबों कि मुस्कुराने की वजह , बे पनाह तेरा प्यार मुझपे लूटाने से है,, “””””””” मैं तो सायद कबका मिट ही चूका था, मेरी साॅसो कि डोर तेरे सहारे से है “”””&#... »

आंखें मे ख्वाबो को सजाने की

एक और ग़लत आंखों में ख्वाबो को सजाने की ” रहस्य ” देवरिया आंखों मे ख्वाबो को सजाने की हिमाकत ना करते। काश दिल में किसी को बसाने की हिम्मत ना करते।। %%%%%%% कबूल कहा होती है अब यहां हर किसी की फरियादे। खुदा के दरबार कभी कोई भी हम मिन्नत ना करते।। %%%%%%% तकलीफ तो कम्बख्त सायद जिन्दगी ही देती है यहा। पहले पता कहा था वर्ना जिने की चाहत ना करते।। %%%%%%% आंखों में ख्वाबो को सजाने की हिमाकत... »

क्यों चली जाती हो ” रहस्य “

रोज मेरे ख्वाबो में आकर क्यों चली जाती हो। पास ना होके दूर से सता के क्यो चली जाती हो।। ********* जब्बभी सोचता हूँ कुछ पल सोलू रातो को। आके यादों में निंद चूरा कर क्यों चली जाती हो।। ********* बेखबर हो तूम मेरी सपनो कि उस दुनिया से। हर बार दिल में दस्तक देकर क्यों चली जाती हो।। ******** रोज मेरे ख्वाबो में आकर क्यों चली जाती हो ” रहस्य ” देवरिया »

आंखें मजबुर थी मेरी ” रहस्य ” देवरिया

हंसकर अपने दर्द छुपाने की कारिगरी मसहूर थी मेरी । चाहकर भी कभी रो ना सकी आंखे सजबूर थी मेरी ।। सजती रही महेफिले बेशक ही अब औरो की शाम मे । हां मगर ये भी तो सच है वो शमा कभी जरूर थी मेरी ।। ” रहस्य ” देवरिया »

तुझे शर्म नहीं आई

नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई। उसे देख तुझे अपनी बेटी याद क्या तुझे नहीं आई।। “” “” ” चिखती चिल्लाती तो कभी दर्द से कराहती भी होगी। उस मासूम पर जरा सा भी रहेम क्या तुझे नहीं आई।। ” “” “” वो तुझे चाचा भईय... »

अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

Dosto गोरखपुर में हो रहे मासूम बच्चों की मौत बहुत ही दूखद हैं मेरे चार शब्द उन बच्चों नाम (( plz god sef the all children’s )) एक एक कर जिन्दगीया निगलती जा रही हैं ये , एक अनसुलझी पहेली बनती जा रही हैं ये ,, ” खिले थै बड़ी मन्नतो से जिनके ऑगन में फूल, उन माँओ की गोद सूना करती जा रही हैं ये , ” रहा करती थी हर पल खुशियाँ जिनके घरों में , वाहा गमों का सागर भरती जा रही हैं ये ,, ̶... »

माँ महंगे होटलों में भी “रहस्य “देवरिया

माँ महंगे होटलों में भी “रहस्य “देवरिया

माँ महेंगे होटलो मे भी (“रहस्य”) तेरी हाथों कि वो दो रोटियाॅ कहीं और बिकती नहीं माँ महँगे होटलों में भी खाने से भूख मिटती नही “””””””””” “””””””””” गरमाहट बहुत मिलती थी तेरी ऑचल कि ऑड मे मुझे अब तो ये ठिठूरन किसी कम्बल रजाई से जाती नही “”””R... »

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