Rajnandini, Author at Saavan's Posts

मृत्यु ही सत्य हैं

मृत्यु ही सत्य हैं शेष सब तथ्य हैं । – राजनंदिनी रावत »

अस्थिर

शीर्षक – अस्थिर जो सोचती हूँ अपने बारे में शायद किसी को समझा पाऊँ, मैं वो पानी की बूंद हूँ जो आँखों से आँसू बनकर छलक जाऊँ तस्वीर बनाना आसान हैं किसी की कोशिश करती हूँ उसकी भावनाओं को समझ पाऊँ, मंज़िल हैं इतनी दूर बनायीं इस मोड़ पर शायद ही कभी लौट पाऊँ ना करना विश्वास मुझ पर कभी मैं वो ख़्वाब हूँ जो आँख खुलते ही बदल जाऊँ तमन्ना रखते हैं जिन चाँद-तारों को छूने की उन्हें जमीं पर रहकर हासिल कर पाऊँ... »

मृत्योपरांत स्मरण

शीर्षक – मृत्योपरांत स्मरण (एक बेटी के भाव अपने पिता की मृत्यु पर ) जिसने हाथ पकड़कर चलना सिखाया आज साथ छोड़ कर जा रहा है वो… गिरकर सम्भलना सिखाया जिसने आज फिर उठने से कतरा रहा है वो जिसने हर एक को बनाया आज टूटे जा रहा है वो ठहरना सिखाया जिसने आज चले जा रहा है वो पढ़ लेता हैं जो मन की बात को आज ज़ुबा से लफ्ज़ बयां ना कर पा रहा हैं वो जिसने चेहरे से ना झलकने दिया गम कभी आज आँसुओ की बारिश में... »

जवाब…

जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… घर जाने से लेकर घर आने का जवाब… खाने से लेकर खाना बनाने का जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… चित्र से लेकर चरित्र का जवाब… सीता से लेकर द्रौपदी तक बस देती ही रही हूं जवाब… समर्पण में दर्पण देखने का समय ना मिला मुझे मगर देती रही मैं सबको जवाब… कभी उद्दंड कभी स्वार्थी कभी चरित्र हीन बताया… थोड़ा अपने लिये जी क्या लिया अ... »

आज ज़िंदगी उस मुक़ाम पर हैं

आज ज़िंदगी उस मुक़ाम पर हैं जहाँ दिल के टुकड़े हो गये औऱ ख़्वाब मुक़म्मल हो रहे हैं… राजनंदिनी रावत रावत-राजपूत »

मन

मन ******** मन की बंजर धरती पर फूल उगाए कौन मेरी सोई हिम्मत को,फिर से जगाए कौन बिखरा-बिखरा हैं मन मेरा टूटा टूटा जाए कल्पनाओ में मेरे फिर आये कौन जहाँ खो गई सुंगध सुमनों की, वहाँ बगिया बनाए कौन, जो खुद से हो अनजान बेख़बर उसे अपनाये कौन अहमियत नहीं जिस चीज़ की उसे अपने घर सजाए कौन अकेला खड़ा है जो सदियों से , किसी के इंतज़ार में, उस खण्डहर में आए-जाए कौन । »

तुम्हारे जाने से

तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी इतनी सी बदली हैं पहले मुस्कुराते थे..अकेले में भी अब सबके बीच हँसते हैं… – राजनंदिनी रावत »

मैं उसकी तलाश में हुँ

मैं उसकी तलाश में हुँ जिसकी तलाश ” मैं ” हुँ… – राजनंदिनी रावत »

माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी…

माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी मैं अपने बेटों को औरत की इज़्ज़त करना सिखाऊंगी माँ,मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी औरत होने का मतलब डरना नहीं मैं अपनी बेटियों को सिखाऊंगी माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी मैं अपने बच्चों को आत्म निर्भर बनना सिखाऊंगी जीवन का मतलब सिर्फ़ बिताना नहीं जीवन अमूल्य हैं, उन्हें समझाऊँगी, माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंग... »

माँ

तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती माँ मैं भी स्कूल में सबके साथ तेरे बनाए पराठे खाती..माँ सब बच्चो की तरह मैं भी ठहाके लगाती..माँ तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती.. माँ जब भैय्या मुझे चिढ़ाते तुम उसे डाँटती..माँ मेरी पढ़ाई के लिए पापा से तुम,लड़ जाती..माँ तु जो होती माँ मैं कभी न रोती माँ मेरा बचपन खिल जाता तेरा प्यार जो मिल जाता माँ तु जो होती माँ मैं कभी ना रोती माँ ज़िंदगी इतनी दुश्वार ना होती अगर तू हो... »

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