Rajnandini, Author at Saavan's Posts

हम बहुत बेकार लोग हैं

हम बहुत बेकार लोग हैं दुनिया के लिए… लेकिन बहुत ख़ास हैं हम “एक-दूसरे के लिए”….. »

कितने सोलह सोमवार किए

कितने सोलह सोमवार किए…. इस ‘सावन’ में तो “पिया” मिले ! »

कई साल बीत गये

कई साल बीत गये

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उनकी तरफ से तो

उनकी तरफ से तो इक इशारा भी ना हुआ… ऒर हम कम्बखत… उनसे इश्क़ कर बैठे हैं…. राजनंदिनी रावत »

कई साल बीत गए

कई साल बीत गए लेकिन लोगों की “छोटी सोच” अभी तक “बड़ी” नहीं हुई…. उन्हें धर्म दिख रहा हैं…. दर्द में तड़पती बेटियाँ नहीं…. »

कोई तो ऐसा मिले ‘खुदा’….

कोई तो ऐसा मिले ‘खुदा’…. जब भी तेरे दर पे आऊँ…. उसके संग ही आऊँ ! राजनंदिनी रावत-राजपूत »

मृत्यु ही सत्य हैं

मृत्यु ही सत्य हैं शेष सब तथ्य हैं । – राजनंदिनी रावत »

अस्थिर

शीर्षक – अस्थिर जो सोचती हूँ अपने बारे में शायद किसी को समझा पाऊँ, मैं वो पानी की बूंद हूँ जो आँखों से आँसू बनकर छलक जाऊँ तस्वीर बनाना आसान हैं किसी की कोशिश करती हूँ उसकी भावनाओं को समझ पाऊँ, मंज़िल हैं इतनी दूर बनायीं इस मोड़ पर शायद ही कभी लौट पाऊँ ना करना विश्वास मुझ पर कभी मैं वो ख़्वाब हूँ जो आँख खुलते ही बदल जाऊँ तमन्ना रखते हैं जिन चाँद-तारों को छूने की उन्हें जमीं पर रहकर हासिल कर पाऊँ... »

मृत्योपरांत स्मरण

शीर्षक – मृत्योपरांत स्मरण (एक बेटी के भाव अपने पिता की मृत्यु पर ) जिसने हाथ पकड़कर चलना सिखाया आज साथ छोड़ कर जा रहा है वो… गिरकर सम्भलना सिखाया जिसने आज फिर उठने से कतरा रहा है वो जिसने हर एक को बनाया आज टूटे जा रहा है वो ठहरना सिखाया जिसने आज चले जा रहा है वो पढ़ लेता हैं जो मन की बात को आज ज़ुबा से लफ्ज़ बयां ना कर पा रहा हैं वो जिसने चेहरे से ना झलकने दिया गम कभी आज आँसुओ की बारिश में... »

जवाब…

जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… घर जाने से लेकर घर आने का जवाब… खाने से लेकर खाना बनाने का जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… चित्र से लेकर चरित्र का जवाब… सीता से लेकर द्रौपदी तक बस देती ही रही हूं जवाब… समर्पण में दर्पण देखने का समय ना मिला मुझे मगर देती रही मैं सबको जवाब… कभी उद्दंड कभी स्वार्थी कभी चरित्र हीन बताया… थोड़ा अपने लिये जी क्या लिया अ... »

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