rajesh arman, Author at Saavan's Posts

badal

बादलों बरसने को आँखें तरस गई है तुम तो न बरसे पर आँखें बरस गई है राजेश “अरमान ” »

ज़िंदगी

ज़िंदगी जब भी ठहरी लगती है अंधी ,गूंगी और बहरी लगती है राजेश”अरमान” »

राजेश”अरमान”

वज़ूद आईने का सामने आ गया जब कोई पत्थर से ठोकर खा गया तब से सम्भाल रखता हूँ ज़ख्मों को जब कोई दोस्त नमक ले आ गया राजेश”अरमान” »

वक़्त

गुजरे वक़्त की स्याही पन्नो पे रहती काबिज़ अब के दौर की दास्ताँ को कोई कलम न दे – राजेश ”अरमान” »

दहकती आग थी

दहकती आग थी

दहकती आग थी कुछ चिंगारियां थी ये तो बस अपनों की ही रुसवाईयाँ थी जो कभी पैरहन से लिपटे मेरे चारसू अब वो न उनकी साथ परछाइयाँ थी राजेश’अरमान’ »

वो प्यार

वो प्यार

वो प्यार इतना मुझे करते है ख्वाबों में आने से भी डरते है इन्तहा इश्क़ का न आलम पूछो वो ज़ख्म देते भी और भरते है राजेश’अरमान’ »

सवाल .जवाब

सवाल .जवाब

      सवाल .जवाब बहुत कहा कोई नई राह चल उसने कहा भीड़ के साथ चल कुछ तो दिल की भी रख लो  दिल बस धड़कने के लिया रखा कुछ तो जज़्बात होते है ये कमजोरों की सौगात होते है तनहा सफर फिर कैसे कटेगा कौन से मुसाफिर मंज़िलें देते है खुद से खफा क्यों होते हो      कौन सी तुम वफ़ा देते हो अपने मौन को शब्दों में बदलो मौन की चाबी फेंक डाली है खुद को रिहा करों क़ैद से क़ैद की चाबी फेंक डाली है                         राजे... »

कभी खुद को मदारी

कभी खुद को मदारी

कभी खुद को मदारी बना दिया कभी खुद ही तमाशा बन गए कभी खुद सिमट कर बैठ गए कभी खुद ही दिलासा बन गए राजेश’अरमान’ »

युँ तो देखे

युँ तो देखे

युँ तो देखे हर पल रंग ज़िंदगी के समुंदर ने बख्शे दिन तिश्नगी के युँ तो काफिलें भी थे मंज़िलें भी तलाश रही मुकाम पाकीजगी के राजेश’अरमान’ »

अब जो चेहरे पे

अब जो चेहरे पे

अब जो चेहरे पे नज़र जाती है साँसें कुछ देर को ठहर जाती है सब यहाँ मौजू मगर खुद ग़ुम कुछ खोने की अब खबर जाती है राजेश’अरमान’ »

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