Raj Bairwa (मुसाफ़िर), Author at Saavan's Posts

शीर्षक – यादों का पिटारा….!!

शीर्षक – यादों का पिटारा….!!

लम्हे बचें जो जिंदगी के वो खुल के काट लें, जो बाकी रह जाए पिटारे में उसे आपस में बांट लें, वो नीले समंदर के किनारे, पिघले मोती से अंगारे, चल ख्वाहिशों की मुट्ठी में बांध लें, वो रंगीन लम्हे जिंदादिल के सारे, खुशी की चादर ओढ़े पलकों की बाहों में थाम ले, धूप छांव के खेल निराले, कुछ अपनी किस्मत के छाले, अपनी प्रेम की वर्षा कर जिंदगी को जिंदगी का नाम दें, लम्हे बचें जो जिंदगी के वो खुल के काट लें, जो ... »

एक शहर….!!

एक शहर….!!

रास्ताें से गुजरते हुए ईक शहर नजर आया, जिससे उढते धुएँ में इंसानियत का रिसता खुन नज़र आया, हँसते हुए चेहराे में, खुद को झूठा साबित करता हर इंसान जाे पाया, तब कहीं जाकर हमें भी कलयुग की रामलीला का सार समझ आया, रास्ताें से गुजरते हुए ईक शहर नजर आया….!! कुछ आेर आगे बडे, ताे खंडर हुईं ईमारताें का मलबा था, कहीं दुआ दबी थी , कहीं काेई शिकायत, कहीं ममता बिखरी पड़ी थी, ताे कहीं साेने की ईंटों के नीच... »