Raghvendra, Author at Saavan's Posts

राघवेन्द्र त्रिपाठी

राघवेन्द्र त्रिपाठी

हर रास्ता हमसे तंग हुआ, हम फिर रास्ते की तलाश मे निकले , शजरो शजर की चाहत मे रास्ते महज इत्तेफाक निकले । ठहरे जहाँ पल भर को ब आजादी ब आबोताब , हमारी आबादी का जनाजा लेकर लोग सब बर्बाद निकले । वो इन्तजार मे था के धुन्ध छटे कोई अपना दिखे , रोशनी हुई तो चेहरे महफूज नकाब निकले । वो अपने ईमान पे अकड़ता रहा ताउम्र, कत्ले जमीर करके लोग सर उठा बेबाक निकले । मुद्दत गुजरी इक हमराह की चाहत मे , वीराने सब अस्बा... »