Priya Bharadwaj, Author at Saavan's Posts

हवा में घुल रहा आज जहर है

हवा में घुल रहा आज जहर है सांसो को आज तरस रहा आज शहर है बंद कमरे में कब तक कैद रहोगे खुले आम घूम रहा आज कहर है »

हसासो का दरिया

लफ्ज ही है जो कतराते है कागज पर उतरने से वरना अहसासो का दरिया तो साथ लिये फिरते है »

गुमराह मोहब्बत

गुमराह मोहब्बत में हम गुमराह हो गए कोई राह न मिली कोई साथ न मिला मिली तो बस तनहाई जिसे साथ लेकर हम तन्हा चलते रहे »

गुजर गये बहुत दिन मुस्कुराये हुए

गुजर गये बहुत दिन मुस्कुराये हुए अब खुदा ने भी सोचा कि कुछ खुशियां इकट्टी की जायें और दुनिया में बांट दी जायें 🙂 🙂 »