Piyush, Author at Saavan's Posts

Kal rahe na rahe

Jalte hue abr ko zehar se bacha lo Fiza ye meharban, kal rahe na rahe Aab ko tezab ke kahar se bacha lo Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe… Azadi ka saaz bulandi se saja lo Inqalabi ye awaaz, kal rahe na rahe… Girte ko kandhe ka sahara dila do Insani jazbat, kal rahe na rahe… Bhule kisi dil ko seene se laga lo Sulagti koi yaad, kal rahe na rahe… Dil ki koi baat zubaan pe u... »

Kya Kare Koi

Kya Kare Koi

…..………………….Just A Few Lines……………….. उसकी खुशबू से महकी हैं सारी फ़िज़ाये गुलों के रंग भी यूँ फीके पड़ जाए न मय न मय-खाना ये जादू कर पाए उसका नशा यूँ, कोई क्या ही कर पाए…. जो बीते है हम पर कोई उनको बतलाये दिल हैं संभालें पर धड़कन ना आये आफत-ए-इश्क़ वो हमको समझाएं पर होवे दोबारा, कोई क्या ही कर पाए…. – पीयूष न... »

Zindagi

Zindagi

बेशक़ सहमा ज़रूर, पर कभी टूटा नही, तेरे लाख डराने पे, कभी रूठा नही,   तेरा इतरांना भी अंदाज़-ए-हसीन ज़िंदगी, पर मेरे हौंसलो का साथ अभी छूटा नही। – पीयूष निर्वाण »

हरिरूपम

हरिरूपम     उठ जाग अलौकिक ये प्रभात, अम्बर में किरणों का प्रकाश, जो भेद सके कोई इनकी जात, तोह करे समुच्चय मानव की बात । विष-व्यंग टीस के सहा चला, मलमार्ग में देह को गला-गला, क्या अधिक थी ये भी मांग भला, उदयाचल रूपी भाल सदा ? हरिरूपम ना कर खेद प्रकट, जनतंत्र निराला खेल विकट, सह प्रमुदित निर्भय आन प्रथम, स्वाधीन परम-तत्व, प्रमोद चरम, पृथ्वी, जल और आकाश, हर रूप स्वयम, हरी निवास, जो भेद सके ... »

बदरंगा इश्क़

बदरंगा इश्क़

Note : इक प्रेमिका इश्क़ मैं धोका खाये जज़्बातों को व्यक्त करती हुई । बदरंगा इश्क़ रंगना था तेरे रंग में, बदरंगा करके छोड़ गए, सदियो के उस वादे को, पल भर में खट्ट से तोड़ गए , जब आये थे अपना बनाने, तब लफ़्ज़ों का पिटारा रहा, उन चिकनी-चुपड़ी बातों ने, मुझको अपना सितारा कहा , वोह डेढ़ चाल शतरंज की थी, इतना तोह मैंने समझ लिया, पर न जाने कब इस रानी को, इक प्यादे ने यूं झपट लिया , वो कहती मेरी सखी-सहेली, न पड फ... »

Kahani

कहानी   जो रक्त न दे सको, तो यह जवानी दे दो… और वह भी तुमको प्यारी हो, तो ज़ुबान ही दे दो… दलदल मैं फसा यह देश, है सहारे की ज़रुरत, ज़रा हाथ लगा कर नवयुग को, प्रेरित करती कहानी दे दो…।   – पीयूष निर्वाण »

Barbarta

Barbarta

Note: एक छोटी सी कविता यह दर्शाते हुए की किस तरह एक भीड़ दंगो का रूप ले लेती है और कौन उसे इतना भड़काता है बर्बरता वोह बोले हमसे वार करो, न चुप बैठो प्रहार करो, जो औरत, बूड़े, बच्चे आये, टूकड़े तुम हज़ार करो । आतंकी रथ सवार करो, और मृत्यु का प्रचार करो, यमलोक भी थर-थर कांप उठे, ऐसा भीषण नरसंहार करो । असुरो को त्यार करो, और मानवता की हार करो, धरती का धड़ चीर-फाड़ के, नर्क का तुम आविष्कार करो । विवेक का भह... »

Sone do

Aaj kehta woh naujawan, Anek hai sapne khone ko, Yeh desh kabhi na badlega, Humko toh bus tum sone do !   Jo soye hum toh sapne bunenge, Chaadar taane, bistar bhigone do, Jis rakt ki hai taalash tumko, Sarhado pe bahe woh khone ko !   Koi noche jo aabroo tumhari, Toh kaano main kapaas pirone do, Na sunenge woh tharraati cheekhein, Bikhri bebas use rone do !   Chaahe jaat-path naasoo... »