Panna, Author at Saavan's Posts

मिलना ना हुआ

कितनी मन्नतें माँगी, तब तुझसे मिलना हुआ, मगर मिलकर भी, हमारा मिलना ना हुआ। »

Guftagu Band Na Ho

Guftagu Band Na Ho

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जानता हूं तुम नहीं हो पास

जानता हूं तुम नहीं हो पास

जानता हूं तुम नहीं हो पास, समझता भी हूं| मगर जो मैं महसूस करता हूं हर पल उसे झुठलाऊं कैसे? »

दास्तान

इक दास्तान है दबी दिल में कहीं कोई सुने तो हम सुनाये कभी| »

जिंदगी

गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं »

नज्म

इक नज्म है जो दबी हूई है दिल की दरारों में आज फिर बहुत कोशिश की मगर निकल ना पाई »

जिंदगी

जितना जिंदगी को पास बुलाओ जिंदगी उतना दूर हो जाती है मंजिलो पर नजर रखते रखते पैरों से राह गुम हो जाती है »

मुक्तक

देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते »

वक्त

नहीं मालूम कहां गुम है वक्त सब ढूढ़ना चाहते है मगर ढ़ूढ़ने को आखिर वक्त कहां है सब कहते फिरते है, वक्त निकालूंगा वक्त निकालने को आखिर वक्त कहां है »

मुखौटा

इक मुखौटा है जिसे लगा कर रखता हूं जमाने से खुद को छुपा कर रखता हूं दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूै बस रोना आता है जमाने की सूरत देखकर मगर झूठी हंसी चेहरे से सटा कर रखता हूं आयेगी कभी तो जिंदगी लौट के मेरे पास इंतजार में पलके बिछा कर रखता हूं आज इक नया मुखौटा लगा कर आया हूं मैं कई सारे मुखौटा बना कर रखता हूं »

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