Pankaj Soni, Author at Saavan's Posts

पानी पानी की

एक ताज़ा ग़ज़ल …….. गुलफिशानी – फूलों की बारिश , बदगुमानी – शक ******************************** मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की … आबरू.. उसकी पानी पानी की …. मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की ….. मैने फिर ग़म की मेज़बानी की …. मैं जिन आँखों का ख़्वाब था पहला क्यों ….. उन्होंने ही बदगुमानी की…. वार मैंने निहत्थों पे न किया यूँ अदा रस्म ख़ानदानी की …... »

” कोई निशानी भेज दो “

मन बहलाने को कोई निशानी भेज दो नींद नहीं आती कोई कहानी भेज दो ….. संजीदा रहूँ हमेशा तेरी यादों में  मेहरबान बन कोई मेहरबानी भेज दो…. भा गया कुछ यूँ दिल को तेरा अपनापन दीदार करने तस्वीर कोई पुरानी भेज दो .. तड़प रहा हूँ कब से मिलने को   उम्मीद तुम कोई पहचानी भेज दो … जो दिलोँ – जान से हो सिर्फ मेरी ख़ुदा ऐसी कोई दानी भेज दो.. महसूस होती हैं अक्सर दिल को तेरी सिसकिया ख़त में मेर... »

” ये तिरंगा “

हर हिंदुस्तानी की इक ख़ास पहचान , ये तिरंगा …. भारत माँ की करता बेनज़ीर शान , ये तिरंगा …. सीमा पर तैनात हर जवान में डाल दे जान , ये तिरंगा …..   ” पंकजोम प्रेम “ »

” बड़ी फ़ुरसत में मिला मुझ से ख़ुदा है…”

    मेरी सांसो में तू महकता हैँ क़ायनात – ए – ग़ैरों में तू ही अपना लगता हैँ 1 . होंठों की ख़ामोशी समझा ना सके नैनों में इश्क़ मेरा झलकता हैँ ( 2 ) भर चुकी हैं सुराही – ए – मोहब्त इश्क़ मेरा अब बूंद – बूंद कर रिसता हैं…. ( 3 ) जितना जाना चाहूँ तुम से दूर कारवाँ यादों का उतना ही तेरी और सरकता है…( 4 ) नैनों से दूर हो तो क्या हुआ ये सुख़नवर तेरा हा... »

” मौत करती है रोज़ “

मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने   मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने   तेरे इंतजार में हुई सुबह से शाम ये देख बदले ज़माने कितने   उन्हें भूख थी मुझ से और उल्फ़त पाने की लेकिन दिल में मेरे चाहत के दाने कितने   नशीली उन निग़ाहों को देख नशा परोसना भूल गए मयख़ाने कितने   रंग जमा देती है मेरी सुखनवर... »

” नया साल आ रहा हैँ “

रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं …..   बेचैन धड़कन हो गयी है शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला रहा हैं ….   जल उठी दिल में कंदीले – ए – इश्क़ ये बे-जुबां भी ग़ज़ले गा रहा हैँ..   सिर्फ साल बदला हैं , इंसान नहीं कुछ तो ख़ामोश रहकर समझा रहा हैं….   वो तो कब का कह चुके हक़ीक़त में  अलविदा फिर क्यों ख़्वाब... »

” इस नववर्ष “

उन्नति को लगी रहे आप से मिलने की लगन …. इस नववर्ष , आपके यहाँ हो खुशियों का आगमन …. सिलसिलेवार रहे चेहरे पर  रौनक – ए – मुस्कराहट ….. रब की रहमत से  सदा महकता रहे आपका घर आँगन….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” इक जिद्द अधूरी रह गयी “

थे क़रीब इक दूजे के …. लेकिन फिर भी दरम्यां हमारे , दुरी रह गयी …. इबादत करते हुए , इक भी दर ना छोड़ा ख़ुदा का … फिर भी कोई मज़बूरी रह गयी.. कह देते थे , महफ़िल – ए – यारों में …. ” वो हैं मेरी ” …   . बस यही इक जिद्द अधूरी रह गयी …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” धुंधला नजारा “

मोहब्त का ले सहारा उन्हें पाने की सोची….. ख़ुद ही बे – सहारा हो गए …..   जिनका अक्श कभी ओझल ना हुआ , नजरों से …. वही आज इक धुंधला नजारा हो गए ….   जिन सागरों के किनारों पर रुक जाती थी …. हमारी कश्ती – ए – चाहत ….   आज वहीँ सागर बे – किनारा हो गए …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” कसक मुसलसल है “

चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की …..   संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की ….   इक मरतबा भुला ही दिया ख़ुदा को बड़ी ख़ुशनसीब जिंदगी थी इस दीवाने की …   बेसूद हुआ एक एक अल्फ़ाज़ मेरा जब कोई राह ना दिखी उसे मुझे चाहने की…..   वो इस क़दर रुसवा हुए मुझ से की इक बार भी ज़रूरत ना समझी लौट आने की …  ... »

Page 1 of 512345