Pankaj Garg, Author at Saavan's Posts

देख परिंदे हमने तेरा गुरुर तोड़ दिया मुख़ालिफतों के तूफ़ान में भी हमने अपने सपनों को उड़ान दी है …….. »

छोड़ दिया हमने सदायें देना तितलियों को , हमने फूल से सीखा है हुनर आशिक़ी का… »

साँसें अपनी रोक कर तुझे छूने की तमन्ना, और हल्का सा छू कर ख़ुशी ख़ुशी वापस लौट आना जैसे की सारा जहाँ जीत लिया हो,     इसी को कबड्डी कहते है…..😉😉 कभी कभी खेल कूद भी लिया करो, मोहब्बत के मरीजों…………😂😂 »

चुभे जो तेरे शब्द तीर….

गला भरा है , दिल जला है, आँखों का सागर भरा है चुभे जो तेेरे शब्द तीर , दिल का जख्म अब तक हरा है ।। मान के बैठा तुझे मैं, दोस्ती का नाम दूजा, मित्रता के इस मंदिर में मैने की थी तेरी ही पूजा धूप में तेरी छाँव बना तो, काँटों में तेरा पाँव बना महकाई बस्ती गुलाबों की , पर आज तेरे अल्फाजों का घाव बना पराया हूँ तेरे लिए , सुन यार तेरा सौ बार मरा है चुभे जो तेरे…… सुना लगा बैठी तू दिल किसी से,... »

कम आंकी

मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले तूने प्यार के आगे मेरी औक़ात कम आंकी ।। »

उसका दर्द

तेरी हर एक धड़कन पे उसी का नाम लिखा है जो उसने नहीं देखा वही अब हमने देखा है तेरे ख्वाबों में दो पल को जो हमने भी घर डाला तेरे ख्वाबों में भी उसी का इन्तजार देखा है ।   तेरी भोली सी मुस्कानें मुझे तेरे पास ले आयी मगर मुस्कान के पीछे , बदली दर्द की छायी अब इक हारे हुए दिल पर करूँ अधिकार मैं कैसे मोहब्बत क्या तुझे मेरी दोस्ती भी रास ना आयी । #पंकज#   »

तुझ बिन बात नहीं होती

भरी हो हुस्न से महफ़िल , तुझ बिन बात नहीं होती गरजते हो घने बादल , मगर बरसात नहीं होती रचायी ना हो मेहँदी तो , दुल्हन खास नहीं होती सितारे व्यर्थ ही चमके यूँ ही जगमग मगर सुन ले, जब तक चाँद ना निकले , कहीं पर रात नहीं होती ।। »

कहना चाहता हूँ

ले लेती है रूप कविता , जब अक्षर दुल्हन बन जाते है गीत गजल तो दिल की बातें जुबां पर ले आते है आँखों से ना बहाओ पानी , सब कायर कह जाते है बह निकले ये लबों के रस्ते , तब शायर बन जाते हैं तो मैं भी इन शब्दों के मेले में झूलना चाहता हूँ अल्फाजों के मोती से माला पिरोना चाहता हूँ लो चल पड़ा मैं भी कहने जो मैं कहना चाहता हूँ || #पंकज# »

दुपट्टा

घूमती अच्छी लगती है ये जुल्फों में, उँगलियाँ  यूँ ना हमपे उठाया करो, संभल जायेंगे दिल हमारे खुद ब खुद, तुम तो अपना दुपट्टा ही संभाल लिया करो »

मुसाफिर (Plzz complete)

चला जा रहा हूँ , दूर बनके मुसाफिर करके हौंसले मजबूत , आँखों को किये काफिर . कैसा है ये सफर , जहाँ मंजिल का भी पता नहीं , कहाँ चला जा रहा हूँ मैं , मुझको भी खबर नहीं , फिर भी ……………………………   friends , Plzz complete this poem. Show your creativity , your emotions…. »

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