Mithilesh Rai, Author at Saavan - Page 30 of 35's Posts

मुक्तक

जख्म जिन्दा है तेरा याद भी आ जाती है! खामोश लम्हों में चाहत तेरी रुलाती है! मैं जी रहा हूँ तन्हा गम-ए-हालात से मगर, चुभन से ख्वाबों की आँख मेरी भर आती है!   Composed By #महादेव »

मुक्तक

कबतलक तेरा इंतजार करें? दर्द की नुमाइश हर बार करें! उलझी हैं मंजिलें हालात से, कबतलक तुमको हम प्यार करें?   Composed मिथिलेश राय ‘ महादेव ‘ »

मुक्तक

किसी के वास्ते हम भी कमाल कर लेते हैं! अपने हर सकून का बुरा हाल कर लेते हैं! खोखले रिवाजों में हम जीते हैं जिन्दगी, मगर हम तकदीरों से मलाल कर लेते हैं!   Composed By #महादेव »

मुक्तक

गम-ए-तकदीर के भी कैसे नजारे हैं! खौफ़ की राह पर ख्वाब सब हमारे हैं! मंजिलों को खोजती है ज़िन्दगी कोई, किसी की ख्वाहिशें ही टूटते सितारे हैं! Composed By #महादेव »

मुक्तक

मैं जी रहा हूँ तेरी कहानी बनकर! दीवानगी की तेरी रवानी बनकर! नाखुदा सी बन गयी हैं चाहतें मेरी, जख्में-जिगर में तेरी निशानी बनकर!   Composed By #महादेव »

मुक्तक

जिन्दगी कभी आज है कभी कल होती है! कभी तन्हा कभी धूप की सकल होती है! लेना-देना पाना-खोना है जिन्द़गी, रोती हुयी आवाज ही गज़ल होती है!   Composed By #महादेव »

मुक्तक

तेरे बगैर जिन्दगी की सूरत क्या है? तेरे बगैर कुछ भी खूबसूरत क्या है? जिन्दा हैं मेरी साँसें सोचकर तुमको, तेरे बगैर जीने की जरूरत क्या है? Composed By मिथिलेश राय ( महादेव ) »

शायद मेरे गम की कभी रात आखिरी हो

शायद मेरे गम की कभी रात आखिरी हो! तेरे दर्द़ से कभी मुलाकात आखिरी हो! मैं कबतक याद रखूँ तेरे अफसानों को? तेरी यादों से तो कभी बात आखिरी हो! Composed By #महादेव mkraihmvns@gmail.com »

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से, शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं! Composed By #महादेव »

मेरी आरजू तो तुमको पाने की थी

मेरी आरजू तो तुमको पाने की थी! हर कोशिश तेरी महफिल सजाने की थी! समझ न पाया मैं तेरी बेवफाई को, तेरी अदा हर शक्स को सताने की थी! Composed By #महादेव »

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