Mithilesh Rai, Author at Saavan - Page 3 of 52's Posts

मुक्तक

तुम खुद को किसी की याद में क्यों खोते हो? तुम जिंदगी को अश्कों से क्यों भिगोते हो? आती हुई बहारों को न रोको दर्द से, तुम हर घड़ी तन्हाई में क्यों रोते हो? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला! तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला! शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के, मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला! तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला! शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के, मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

कभी-कभी चाहत जंजीर सी लगती है! कभी-कभी सीने में तीर सी लगती है! जब कभी भी होती है यादों की आहट, दर्द की हाथों में लकीर सी लगती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

क्या कर पाया मैं और क्या कर जाऊंगा? तेरे बिना मैं तो यूँ ही मर जाऊंगा! जब कभी तुम देखोगे आईना दिल का, तेरे ख्यालों में तन्हा बिखर जाऊंगा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

अब चाहतों के हमको नजारे नहीं मिलते! अब ख्वाहिशों के हमको इशारे नहीं मिलते! हर वक्त ढूंढ लेती है तन्हाई दर्द की, अब हौसलों के हमको सहारे नहीं मिलते! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

हर शख्स जमाने में बीमार जैसा है! ख्वाहिशों का मंजर लाचार जैसा है! सहमी हुई तकदीरें हैं इंसानों की, आदमी सदियों से बाजार जैसा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

कभी चाहत जिंदगी में मर नहीं पाती! कभी दौरे–मुश्किलों से डर नहीं पाती! हर वक्त नाकामी का खौफ़ है लेकिन, कभी आरजू ख्याल से मुकर नहीं पाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

आज फिर हाँथों में जाम लिए बैठा हूँ! तेरे..दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ! वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें, तेरा फिर लबों पर नाम लिए बैठा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

आज फिर हाँथों में जाम लिए बैठा हूँ! तेरे..दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ! वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें, तेरा फिर लबों पर नाम लिए बैठा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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