Mithilesh Rai, Author at Saavan - Page 2 of 39's Posts

मुक्तक

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होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ! तेरी तमन्नाओं की जागीर से मिलता हूँ! नजरों को घेर लेता है यादों का समन्दर, चाहत की बिखरी हुई तकदीर से मिलता हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ! तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ! जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के, जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

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तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ! तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ! जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के, जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

यादों की राह में सवाल आ जाता है! तेरी रुसवाई का ख्याल आ जाता है! जब भी ख्वाब आते हैं मेरी आँखों में, तेरी जुदाई का मलाल आ जाता है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मुक्तक

मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो? मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो! यादों की आहट रुला देती है मुझको, #साँसे_जिस्म को गमों से जोड़ गये हो! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं »

मुक्तक

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है! मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की? जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

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मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है! मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है! चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी, मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

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होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी यादों की लहर पास चली आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

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पास हो कर भी जरा सा दूर हो तुम! हुस्न पर अपने बहुत मगरूर हो तुम! तेज हैं तलवार सी तेरी निगाहें, बेवफाओं में मगर मशहूर हो तुम! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मुक्तक

जब से लबों पे आया है तेरा नाम फिर से! जैसे लबों पे आया है कोई जाम फिर से! तेरी याद बंध गयी है साँसों की डोर से, मुझको तरसाती हुई आयी है शाम फिर से! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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