Mithilesh Rai, Author at Saavan - Page 2 of 53's Posts

मुक्तक

मैं ख़ुद की तरह ज़ीने का जुनून रखता हूँ। मैं दिल में अरमानों का मज़मून रखता हूँ। हौसला क़ायम है अभी दर्द को सहने का- मैं ख़ुद में तूफ़ानों को मक़नून रखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के जैसे सिल गये हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मैं हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ। मैं हार कर भी तेरी निशानी की तरह हूँ। मैं ठोकरें खाता रहा हूँ उम्र भर लेकिन- मैं जोशे-ज़िन्दग़ी में ज़वानी की तरह हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी ज़िन्दग़ी में आकर चले गये? हर ग़म को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं- क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मैं अपनी तमन्नाओं पर नकाब रखता हूँ। मैं करवटों में चाहत की किताब रखता हूँ। जब भी क़रीब होती हैं यादें ज़िन्दग़ी की- मैं दर्द तन्हाई का बेहिसाब रखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

आज भी तेरी जिग़र में आरज़ू जवां है। आज भी निगाह में ख्व़ाबों का कारवां है। उल्फ़त के समन्दर में तूफ़ान हैं लेकिन- मुसीबत में ठहरने का हौसला रवां है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

हम तेरी याद में रो भी लेते हैं। हम तन्हा गमज़दा हो भी लेते हैं। जब रंग सताता है तेरे हुस्न का- हम खुद को नशे में खो भी लेते हैं। रचनाकार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

अभी तेरी आरज़ू का ग़ुबार है दिल में। अभी तेरी यादों का संसार है दिल में। ख़ौफ भी रुसवाई का मौजूद है लेकिन- अभी तेरे ख़्यालों का बाज़ार है दिल में। मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

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