Manoj, Author at Saavan - Page 8 of 8's Posts

कविता

सो रहा कई रातों का जगा तुम आज मुझे जगाना मत | शब्दों के घाव बड़े मतिहीन उर को मेरे पहुँचाना मत || होती रिश्तों की डोर नरम कदापि इसे आजमाना मत | होते है कान दिवारों के खुद को भी राज बताना मत || छल क्षद्म भरा सारा जग है मुझसे तुम नेह लगाना मत | यदि मन मुझसे लग जाये तो नीज नेह भी मुझे जताना मत || उपाध्याय… »

गजल

गजल

” गजल ” जहर मौत और जिन्दगी भी जहर है सिसकती है रातें दहकता शहर है | सदमों का आलम बना हर कही पर सहम अपने घर में हम करते बसर है || ना हम एक होंगे क्यों सय्याद माने हमी खुद ही खुद के कतरते जो पर है | हमारी ही करतूत के है खामियाजे न दहशत हुकूमत पे होता असर है || न हिन्दू ना मुश्लिम नही कोई काफिर ना मजहब है कोई नही उनका घर है | जमी पर उगाते फसल जो बला की ना मंदिर ना मस्जीद नही कोई दर है || ... »

Page 8 of 8«678