Manoj, Author at Saavan - Page 3 of 8's Posts

कविता-पानी बचा लो

………पानी बचा लो…….. पानी नही बचा तो धन करोगे क्या बटोर कर पानी बचा लो अपना कोई जतन निहोर कर | कब तक पिलाएगी धरा छाती निचोड़ कर गिरते ही जा रहे हो सब सरहदों को तोड़ कर|| पानी नही सूखी पड़ी नदियाँ हैं हर कही गुस्सा निकालते क्या गगरी घड़े को तोड़ ! तुम भी दरक्खतों से दिल लगा लो दोस्तों एक पेड़ लगा लो तुम सब उलझनों को छोड़ !! उपाध्याय… »

मुक्तक-पुष्प की अभिलाषा

पुष्प की अभिलाषा -(एक मुक्तक) …………………………………………….. टूट कर शाख से शायद बिखर गया होगा कुचल कर और ओ गुल निखर गया होगा | जिसके जज्बे में वतन पे शहीद था होना मुल्क के वास्ते मर कर ओ तर गया होगा || उपाध्याय… »

कविता

कविता

प्राण प्रग्या को बचाये चल रहा हूँ कर प्रकाशित मै तिमिर को जल रहा हूँ | अल्प गम्य पथ प्रेरणा देता मनुज मैं उतुंग गिरि सा शिखर अविचल रहा हूँ || शिथिल वेग स्निग्ध परियों का शरन है मै नही मतिहीन इसमें पल रहा हूँ | मैं गिरा गति लय प्रौढ़ाधार में बहता हुआ भूत से चल आज भी अविरल रहा हूँ || उपाध्याय… »

मुक्तक

रूह उठती है काँप जमाने की तस्वीर देख कर खुशनसीब और बदनसीब की तकदीर देख कर | कोई हाजमे को परेशां है कोई रोटी की खातिर बहुत हैरत में हूँ हथेलियों की लकीर देख कर || उपाध्याय… »

मुक्तक-मनहरण घनाक्षरी

अनुभव कंटक-जालों का बस उसी पथिक को होता है जिसका चरण अग्निपथ चलकर कभी जला होता है | मखमल और कंचन पर सोने वालों पता तुम्हें क्या है जीवन सच में आतप अंधड़ में जीने वालों का होता है || उपाध्याय… »

मुक्तक

मुक्तक

बिस्तर से उठ चुके हैं मगर अब भी सोये है न जाने कैसे ख़्वाब में मतिहीन खोये है | गैरत ईमान का खतना बदस्तूर है जारी आँखों ने कर दिया बयां छुप छुप के रोये है || फिर भी लगे है दाग के दामन से धोये है सब कुछ लगा है दाव पर सपने संजोये है | उम्मीद फिर लगी उसी साहिल से आज भी जिसने कि बार हां मेरी कश्ती डूबोये है || उपाध्याय… »

मुक्तक-घनाक्षरी

कुछ अंध बधिर उन्मूलन किया करते है अथवा पंगु गिरि शिखर चढा करते है | कुछ सीमित आय बंधन में बांध हवा को क्षैतिज उदीप्त किरिचों पर चाम मढते हैं || लेकिन कौन जो रोक सका शशि रवि को लेखक विचारक और भला किस कवि को ! यह अनमोल धरोहर है स्वच्छंद धरा की मति मूढ सहज सीमा इनकी तय करते है || ललचाते नयन लिये पैसों पर बिक जाते है जो शिक्षा बेच मदिरालय में मदिरा पी जाते है | जिनकी बुद्धि छोटी जीवन का मूल न जाने चाट... »

कविता

कविता

“गान मेरे रुदन करते”(मेरी पुरानी रचना) गान मेरे रुदन करते कैसे मैं गीत सुनाऊँ जैसे भी हो हंस लेते तुम क्यों मैं तुझे रुलाऊँ | हृदय वेदना बतलाऊँ या जीवन सार सुनाऊँ दोनों का रिश्ता सांसो से छोड़ूं किसको अपनाऊँ || तुमने दिया गरल तो क्या मैं नित नित विष पीता हुँ गिन गिन के जीवन के पल मरता हुँ और जीता हुँ| यदि मैं तुझे सूना दुँ तो क्या तुम मुझे समझ पाओगे डरता हुँ तुम भी तज दोगे क्या तुम अपन... »

कविता

कविता

“बच्चे के जीवन में माँ का महत्व” …………………………………………. माँ तपती धूप में ओस की फुहार है माँ ममता है धरती का सबसे सच्चा प्यार है | माँ है तो बचपन खिलखिलाता फूल है माँ नही है तो जीवन में पग पग पर शूल है || इसलिए दुनिया मे भगवान का स्थान दूजा है सच में माँ सर्वप्रथम घर की आरती है पूजा है ¦| तो माँ क... »

गजल

गजल

मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये ! ईद में मिल के गले होली मना लेते काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !! बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी साहब पूरोहित पंडित का भी सम्मान हो जाये जुर्मकारी को जेहादों को दफन कर दें इंसा अल्ला ये पुरा अरमान हो जाये || उपाध्याय… »

Page 3 of 812345»