Manisha Nema, Author at Saavan's Posts

होली

छुअन तुम्हारी अँगुलियों की, मेरे कपोलों पर, आज भी मौजूद है, तुम्हारी आँखों की शरारत मेरी, तासीर की हरारत में, आज भी ज़िंदा है, तुम तसव्वुर में जवान हो आज भी, हमारी मुहब्बत की तरह, हर मौसम परवान चढ़ता है रंग तुम्हारा, एक ये एहसास ही काफी है मुझे के, तुमने मुझे चाहा था कभी अपनी सांस की तरह, वक्त गुज़रा हज़ारों सूरज ढल गए, तुम्हें पता है क्या……………. मैं अभी तक वहीं खड़ी हूँ कि... »

मुखौटा

सादर नमन ‘सावन’ २/२/२०१८ शीर्षक- ‘मुखौटा’ ———————————————– चहरे पर चहरे का खेल है, सूरत सीरत से बेमेल है, कोई हमको नहीं भाता, किसी को हम नहीं भाते, जाहिर सी बात है साहेब, मुखौटे बदलने के हुनर, हमको नहीं आते, एक दिन ज़िन्दगी ने हमसे ही पूछ लिया, क्या तुझे जिंदगी जीने के हुनर नहीं आते?? दुनिया संगदिल, जेब ... »

26 जनवरी

….गणतंत्र दिवस…. लो फिर आ गई २६ जनवरी, नौजवानों को समझाने, क्या होता गणतंत्र ये, बलिदानों का गुण गाने, आज के हर युवा का फ़र्ज़ है ये, उन संघर्षों, उन वीरों को पहचानें, मौत चली थी श्रद्धा से जिनकी, हिम्मत को आज़माने, …………… जब देश मेरा परतंत्र था, हर वाशिंदे के मन में रंज था, आज़ादी के परवानों ने, गुलामी की नीव हिला दी, देश छोड़ अंग्रेज़ भागे जब, वीरों ने जिद की ठ... »

हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

हमारी आन, मान, शान “हिंदी” ……………………………………… भावनाओं का सागर हो दिल में, तो एक कश्ती उतरती है, विचारों की बाहों में बाहें गूँथ कर, लहरों सी सुंदर पंक्तियाँ बुनती है, ये साहसी काम बस, हमारी प्यारी भाषा ‘हिंदी’ करती है, …………. भाषा के गागर से उछल उछल कर निकलते शब्द, मान, मर्यादा, अपनत्व, प्... »

शहीदों की होली

शहीदों की होली

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” रंगों का गुबार धुआँ बन कर, उठ रहा है मेरे सीने में……………. वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था, आज़ादी की जंग में, वो रंग जो निकला था आँखों से, चिनगारी में, वो रंग जिससे लाल हुई थी, भारत माता, इन्हीं रंगों का ... »

शहीदों की होली

शहीदों की होली

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” रंगों का गुबार धुआँ बन कर, उठ रहा है मेरे सीने में……………. वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था, आज़ादी की जंग में, वो रंग जो निकला था आँखों से, चिनगारी में, वो रंग जिससे लाल हुई थी, भारत माता, इन्हीं रंगों का ... »