Manish Upadhyay, Author at Saavan - Page 3 of 6's Posts

जालियाँवाला बाग़ 13 अप्रैल

#जालियाँवाला_बाग़ #13अप्रैल कुछ दाग़ लगे जो इतिहास पे, वो दर्द बहुत दे जाते हैं, किस्से जब उसके सामने आते रूह तब-तब फिर काँप सी जाती है रोती है आत्मा मेरी भी जब जिक्र उस मंजर का आ जाता है क्रूरता के बद्तर ढंग को जलियाँ वाला बाग़ की बातें सामने ला जाती हैं नमन करता हूँ दिल से मैं भी उस कांड में हुए शहीदों को देश की ताकत कम न होने देने वाले देश के अद्भुत वीरों को।। -मनीष »

सुकूँ

सुकूँ कुछ ऐसा मिलना चाहिए जिंदगी को, जैसे तेरे नर्म हाँथो पे मेरे हाँथ होने का एहसास हो।। -मनीष »

ख़ुशियों के पल में तो …

ख़ुशियों के पल में तो ख़ुशियों ने बख़ूबी साथ निभाया, और जब-जब मन निराश हुआ तब-तब क़लम के माध्यम से बनी कविता ने शांति का एहसास कराया, मैं अपनी कलम के हर एक सफर को नमन करता हूँ मेरे लेख को समझने वाले हर एक सदस्य का आज विश्व कविता दिवस पर तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। -मनीष »

सफरनामा

#सफरनामा जहाँ इंसान दुःखी होता है वहाँ ही सिर्फ अल्लाह या भगवान् के नाम से मिलता है नहीं तो सिर्फ और सिर्फ आगे बढ़ो का फ़रमान मिलता है।। -मनीष »

हार जीत

कल हार थी, आज जीत है आज जीत कर भी मैं अधूरा सा हूँ, ये जिंदगी की कैसी रीत है। -मनीष »

तेरी पहली पंक्ति में

तेरी पहली पंक्ति में मैंने तुझे शीशे सा टूटता हुआ देखा, और जब तूने दूसरी और अंतिम पंक्ति लिखी तो उसी शीशे के टुकड़ों को ज़मीन पर बिखरते हुए देखा, तेरे लेख से मैंने तुझको बार-बार करीब से देखा, जब-जब देखा तुझे शीशे की तरह टूटता हुआ ही देखा।। -मनीष »

जिंदगी कटती नहीं बिना खुद को आजमाने से

कुछ परेशानी से तो कुछ संघर्ष की कहानियों से, जीवन नहीं कटता बिना दुःख और दर्द की निशानियों से, कभी टूटता तन, तो कभी रूठता मन लम्हे कितने भी खूबसूरत क्यों न हों, हर खूबसूरती के पीछे छिपा है लंबे समय तक हुआ एक-एक पल का दम तुम कितना भी पस्त हो और कितना भी लस्त हो जाओ हार मत मानो इस तरह की स्थिति सामने आ जाने से क्योंकि जिंदगी नहीं कटती बिना दुःख और दर्द की निशानियों से, घर बनने में क्या समय लगता, महल... »

‘हम’

इतना चाहने पे भी तू सनम न हुआ, बस यही तो गम है कि तू ‘हम’ न हुआ की तू ‘हम’ न हुआ।। -मनीष »

कई क़िस्से, कई बातें

कई क़िस्से, कई बातें फिर हँसती खिलखिलाती मुलाकातें, उन दिनों की एक-एक यादें आज भी मेरे साथ हैं, तू जो छोड़कर चला गया अब क़लम ही एक विश्वास है, तेरे इश्क़ के अनुभव लिखने पे अंजानो में भी हम खास हैं, तेरा जो छूटा साया क़लम ने दुनिया से मिलवाया, चंद शब्द लिखकर हमने कई लोगों के दिल में जगह बनाया, तेरे इश्क़ का अनुभव मेरे जीवन का एक प्रमाण है ”वाह” जब-जब कोई साथी कहेगा उसमे तेरा भी सम्मान है।। -म... »

भारतीय रेल

#भारतीय_रेल लोहे की खिड़की पे सिर रखकर, सपनो को करीब से देखा है, पहियों के रफ़्तार से, अनुभव को भरपूर जीता है इस तरह यादें समेटे सफर चलता जा रहा, भारतीय रेल का ये साथ अनूठा अब हमसे न भूला जा रहा, -मनीष »

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