Manish Upadhyay, Author at Saavan's Posts

कोई तंग है, कोई हैरान है

कोई तंग है, कोई हैरान है जिंदगी आज कुछ इस तरह से परेशान है चेहरे हँस रहे है फिर भी रौनक उनमें कम है शायद मन ही मन वो बहुत उलझा सा खुद में ही कहीं गुम है, सपनों को पूरा करने के लिए वो हर सुबह निकलते हैं दिन भर एक धुन में रहने के बाद वो रात की नींद से लड़ते हैं छोटे-छोटे बच्चों को खेलता देखता हूँ तो सब भूल जाता हूँ जीवन की इस दौड़ में भटक सा गया हूँ बार-बार मैं मन को यही समझाता हूँ बड़ी दौलत और शौहरत ब... »

वो बचपन वाला मैदान

वो बचपन वाला मैदान आज भी मेरे इंतज़ार में मुझसे मिलने को तरस रहा है, अब तो बादल भी गुस्से में है मेरे यार मेरे न होने पे वो सिर्फ गरज रहा है, सिर्फ गरज रहा है।। -मनीष »

इतने गर्म शहर में भी चुभ सी रही हैं

इतने गर्म शहर में भी चुभ सी रही हैं, ये सर्द हवा, ये शीतल सा पानी, ये सुकूँ भरी छाओं ऐ दोस्त कितना भटक स गया है न ये मन की मैं सुकून में भी सुकूँ भरा “मैं” नहीं ढूंढ़ पा रहा हूँ।। -मनीष »

ज़माने से बेपरवाह रहती है

ज़माने से बेपरवाह रहती है दुनिया के दिखावे से अंजान है माँ तू ऐसी क्यों है जो मेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ संजोए रहती है।। – मनीष »

तेरा प्यार अनंत है माँ

हर पल मेरी परवाह करते थकती क्यों तू न है, माँ मुझको इतना बतला दे तेरा भी क्या सपना है।।   चंदा मामा के किस्से कहकर कैसे हँसते-हँसते तू लोरियाँ सुनाती थी माँ मझको इतना बतला दे इतना स्नेह कैसे तू लूटा पाती थी   तुझसे जो थोड़ा दूर हो जाऊँ पल-पल मझसे तू पूछते जाती थी कैसा है बेटा कहकर, खाना समय से खा लेने की सलाह दे जाती थी   मेरे सपने को अपना कहकर निस्वार्थ प्रेम जो तूने दिखलाया हर पल प... »

कितना भी ज़िद्दी बन जाऊँ

कितना भी ज़िद्दी बन जाऊँ, माँ थोड़ा भी न गुस्सा होती है, एक निवाला अपने हिस्से का खिलाकर माँ फिर चैन से सोती है।। -मनीष »

न तुम हो न हम हैं

न तुम हो न हम हैं फिर भी वो एहसास हर दम है, इशारों से बातें करना, मंद-मंद न चाह के भी मुस्कुराना, तेरी हर एक हलचल को मुझे तेरे करीब लाना, जिंदगी आज कुछ इस तरह से ही संग है न तुम हो न हम हैं फिर भी वो एहसास हर दम है कभी ज़ोर से चिल्लाना फिर मन ही मन उस गुस्से से दुखी हो जाना, हँसते-हँसते आँखों का नम हो जाना तेरे प्यार की ताक़त हर पल मेरे संग है न तुम हो न हम हैं फिर भी वो एहसास हर दम है बार-बार बिखरन... »

जीवन में तू ताकत देना उठने की,

कितना भी गिरूँ जीवन में तू ताकत देना उठने की, ऐ खुदा अस्त सूरज सा खूबसूरत दिखूँ और चढ़ते सूरज सा ऊर्जावान।। -मनीष »

कुछ संघर्ष को भी सीख ले

कुछ संघर्ष को भी सीख ले फिर जिंदगी को तू जीत ले, कभी मुश्किलों की हार से कभी तजुर्बे की मार से हौसला थोड़ा सा डिग जाएगा फिर भी तू लड़ता जाएगा कुछ संघर्ष को भी सीख ले फिर जिंदगी तू जीत ले जीत की क्या बात है हार के बाद जो मिली वो हमेशा खास है कभी तोड़ के फिर मरोड़ के अपनी आत्मा में तू झाँक के अपनी हिम्मत को फिर जोश से सींच ले कुछ संघर्ष को भी सीख ले फिर जिंदगी तू सीख ले -मनीष »

कोख़ से मैं कितना बचती रही

कोख़ से मैं कितना बचती रही, दुनिया में ला कर तुमने ठुकराया, शर्म मुझे है ऊपरवाले की इस रचना पर जहाँ जिस्म के भूखों को मैंने कदम-कदम पे पाया।। -मनीष »

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