Lucky, Author at Saavan's Posts

दीवाली

इस दीपक में एक कमी है,,,, हर सैनिक की याद जली है ।।।।।।। जिसने दी आज़ादी हमको,,,,,,,,, उनकी बेहद कमी खली है ।।।।। दुश्मन को मारा सरहद पे,,,,,,,,,, तो दीवाली आज मनी है ।।।।।।। देखो इनको भूल न जाना,,,,,,,,,,, जो अब तेरे बीच नही है ।।।।।।। जिसने खोया अपना बेटा,,,,,,,,,, उन माँओं की आह सुनी है ।।।।। देके खुशियाँ हम लोगो को,,,,,,, गोली खुद के लिये चुनी है ।।।।। अपने भाई के आने की,,,,,,,, बहना को इक आस ... »

जंग

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ज़िन्दगी

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है जिन्दगी।।। ना सुकूँ है दिल बडा बेचैन है,,, आग के जैसे जली है जिन्दगी।।।। उलझनो में ही सदा उलझा रहा,,,, मकङियो के जाल सी है जिन्दगी।।। ख्वाब है ना आखँ में नींदे कहीं,,,,, खार सी चुभने लगी है जिन्दगी।।। फुरसतो के पल नही मिलते म... »

साजन

तुझको ही बस तुझको सोचू इतना तो कर सकती हूँ,,,,,,,,, तेरे ग़म को अपना समझू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।।। मुझको क्या मालूम मुहब्बत कैसे करती है दुनिया,,,,,,, हद से ज्यादा तुझको सोचू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।। इस दिन को तू मेरे सजना इतना तो ह़क दे देना,,,,,,,,,,,, छलनी में से तुझको देखू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।। आज मुबारक वो दिन आया सामने मेरा साजन है,,,,,,,,,, तेरे ग़म के आँसू पी लू इतना तो ... »

￰वतन

वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,, सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।। जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,, वतन से प्यार कितना है जहाँ को हम दिखा देगें।। हजारो साल काटे हैं गुलामों की तरह हमने,,, नहीं अब और सहना हैं ये दुनिया को बता देगें।। कसम है उन शहीदों की लुटा दी जान सरहद पे,,, उसी रस्ते चलेंगे और अपना सर कटा देगें।। हमारे गाँव का बच्चा नहीं है कम किसी से भी,,, जहाँ भी प... »

वो औरत

वो औरत

करे हैं काम वो इस धूप में जलती सी इक औरत,,, गमों को झेल लेती है सभी, गहरी सी इक औरत।।। बडों का मान रखती है झुकी रहती है कदमो में,,, कि रिश्तों के दरख्तों पे लगी टहनी सी इक औरत।। थकी जाती है सारे दिन घरों के काम में लेकिन,,, सजन के वास्ते पल में सजी सवंरी सी इक औरत।। सभी इल्जाम दुनिया ने इसी पर थोप रक्खे हैं,,, खड़ी रहती है दरवाजे पे वो सहमी सी इक औरत।। चटकती धूप में सबके लिए रोटी बनाती हैं,,, जला ... »