Harendra singh kushwah "aihsas" (एहसास), Author at Saavan's Posts

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है।   ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, तू बच्ची को भी हुस्न ए बहार कहता है।   थक गया हर शख़्स काम करते करते, तू इसे ही अमीरी का बाज़ार कहता है।   गांव चलो वक्त ही वक्त है सबके पास, तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है।   मौन होकर फोन पर रिश्ते निभाए जा रहे हैं, तू इस मशीनी दौर को परिवार कहता है।   वो मिलने आते थे कल... »

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर , नहीं फिर प्रेम उग पाया रही दिल की ज़मी बंजर । मैं बर्षों से वही बैठा जहाँ तुमने कहा रुकना , जुदाई देख ली मैंने बडे अदभुत रहे मंजर ।। हरेन्द्र सिंह कुशवाह ~~~एहसास~~~ »

सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कबतक लगायेगा

सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कबतक लगायेगा

सभी  इल्ज़ाम  शीशे  पर  ये  जग कबतक लगायेगा , भला।  नाकामियों   को   वो   यहाँ   कैसे   छुपायेगा ।   तुम्हारा  है  तुम्ही  रख  लो  उजाला  और  सूरज भी , हमारा   यार   जुगनू    है    हमें    रस्ता    दिखायेगा ।   चरागों   के   लिए   मैंने   हवा   से  दुश्मनी  कर  ली , मुझे  क्या  था  पता  वो  तो  मेरा  ही  घर  जलायेगा ।   सही  मंज़िल  हकीकत  में  उसे  हासिल  नहीं  होगी , कभी जो साजिशों ... »

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी, चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी. देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन, भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी. बिगडे लोगो के लिए बिगडे तरीके चाहिए जी, बदसलूकी भी हमारी तब हुनर हो जायेगी. दुनियाँ मानेगी लोहा फ़िर हमारा सदियों तक, जिधर चलेगे एक हो वही डगर हो जायेगी. ढूँढ लेंगे हम आँधेरे मे सफ़र अपना हुजूर, सूर्य की ये रोशनी भी कम अगर हो जायेगी. हम अकेले ही चलें... »

तेरी बुराईयों को हर अखबार कहता है,

तेरी  बुराईयों  को  हर अखबार कहता है, और  तू  है  मेरे  गाँव  को गँवार कहता है. ऐ  शहर  मुझे  तेरी सारी औकात पता है, तू  बच्ची  को भी हुश्न-ए-बहार कहता है. थक  गया है वो शक्स काम करते -करते, तू  इसे  ही अमीरी और बाज़ार कहता है. गाँव  चलो  वक्त  ही  वक्त है सब के पास, तेरी  सारी  फ़ुर्सत  तेरा इतवार कहता है. मौन  होकर फ़ोन पे रिश्ते निभाये जा रहे, तू इस  मशीनी दौर को परिवार कहता है. वो  मिलने  आते ... »