Kumar Bunty, Author at Saavan's Posts

तेरे न होने का वज़ूद

एक तू ही है जो नहीं है बाकि तो सब हैं लेकिन… तेरे न होने का वज़ूद भी सबके होने पे भारी है मुझे भी जैसे तुझे सोचते रहने की एक अज़ीब बीमारी है। नहीं कर सकता आंखे बंद क्योंकि तेरा ही अक्ष नज़र आना है उसके बाद तब तक जब तक मैं बेखबर न हो जाऊ खुद के होने की खबर से और अगर आंखे खुली रखूँ तो दुनिया की फ्रेम में एक बहुत गहरी कमी मुझे साफ नज़र आती है जो बहुत ही ज्यादा चुभती चली जाती है क्योंकि उस फ्रेम में... »

SHAYARI

उसके चुप रहने का अंदाज़ बहुत कुछ कहता है इशारो की बातें हैं कोई लफ्ज़ भी इतने सलीखे से नहीं कहता है। »

अपने ही सूरज की रोशनी में

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था अज़नबी बनकर जी रहा।   दूसरो के कितने ही कटे जख्मों को  है वो सी रहा लेकिन अपने ग़मों को अभी भी वो खुद ही है पी रहा।     कितनी ही बार जमाने ने उसे गिराया लेकिन वो फिर–फिर उठकर जमाने को ही सँवारने की तैयारी में है जी रहा।   अपने दीया होने का उसने कभी घमण्... »

ख़ुशी क्या है ?

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY »

क्या लिखूँ ?

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर रहा मैं प्राणी आम लिखूँ।   मन तो मेरा कहता है कि लगातार लिखूँ और दिल भी पुकारता है कि सबके सामने सरेआअम लिखूँ।       कितनों ने दिया साथ और कितनों ने दिखाया खाली हाथ क्या वो भी लिखूँ।   वक़्त केसे पड़ गया कम होते हुए भी मन में समु... »

तू ही बता दे जिंदगी

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन तुम इतनी भी देर मत करना कि खो चुका हूँ मैं खुद को ही कहीं।                                                                                                                                                                                         —̵... »

लकीरों के बीच तस्वीर

लकीरों के बीच तस्वीर

कभी–कभी कागज पर खिंची लकीरों के बीच भी कोई तस्वीर इस कदर से जिंदा हो जाती है कि जिसकी होती है वो तस्वीर उससे मिले बगैर ही उससे मिलकर होने वाली बातें उस तस्वीर से हो जाती है।                                        –कुमार बन्टी   »

सिर्फ मधु ही नहीं

तुम्हारे होठों का सिर्फ मधु ही मुझे प्यारा नहीं बल्कि प्यारी लगती हैं वो कड़वी बातें भी जो तुम कहती हो क्योंकि वो होती हैं हमेशा ही मेरे भले की।                                                 –   कुमार बन्टी   »

QUOTES

”Prepare for future But just Not so vast That you might have lost The present”                                                          – KUMAR BUNTY »

LIFE IS SO COOL

Life is so cool Because how easily it makes us fool When it wants And we can’t denied to it Because we are actually so unaware about it Till even it passes through To me and also to you   »

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