कुमार अरविन्द, Author at Saavan's Posts

जहां में चाहे गम हो या खुशी क्या

गजल : कुमार अरविन्द जहां में चाहे गम हो या खुशी क्या | मेरे मा – बैन रंजिश दोस्ती क्या | खुदा मुझको यकीं खुद पे बहुत है | तो पंडित हो या चाहे मौलवी क्या | मुहब्बत के ‘ चरागे – दिल बुझे हैं | तो जाये आज या कल जिंदगी क्या | हजारों ‘ ख्वाहिशें ‘ फीकी पड़ी हैं | मुकद्दर है नही तो फिर कमी क्या | अगर ‘ तुम छोड़ दो लड़ना तो सोचूं | गुलों की खार से होगी दोस्ती क्या | »

नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते

गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | उसी इंसान को ऐसे नहीं बे – आबरू करते | हमें मिलने का मौका तो नही मिल पायेगा जानम | कभी ख्वाबों में आ जाओ तो जी भर गुफ़्तगू करते | ज़हर का घूंट पीकर भी बचे यदि तो बचा लेना | किसी भी हाल में साहब नहीं ‘रिश्तों का खूं करते | ये दिल का... »

मुहब्बत की गली कूचों में क्या है

गजल : कुमार अरविन्द मुहब्बत की गली कूचों में क्या है | इधर देखो मेरी आँखों में क्या है | बड़ा ही जोर है उन के जुबां में | नही तो जोर जंजीरों में क्या है | ये करने वाले हैं कर जाते हैं सब | वगरना आग तकरीरों में क्या है | खुदाया दिल नही देखा कहीं पे | खुदा को पा गये ख्वाबों में क्या है | »

चले आओ मेरी आँखों का पानी देखते जाओ

गजल : कुमार अरविन्द चले आओ मेरी आंखों का पानी देखते जाओ | कहानी है तुम्हारी ही , निशानी देखते जाओ | मैं जिन्दा हूं तुम्हारे बाद भी तुमको तसल्ली हो | कफ़न सरका के मेरी बे – ज़बानी देखते जाओ | तुम्हारी बेबफाई का उतारूं आज मैं ‘ सदका | मेरी यूं ‘ ख़ाक में मिलती जवानी देखते जाओ | कहां गुजरी गुजारी जिंदगी तुमको पता कैसे | मेरे इस दर्द की पागल कहानी देखते जाओ | हमारे पैरहन से ख़ुशबुएं आती... »

वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए

गजल वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए | बाखुदा हूं ‘ खुदा बाखुदा कीजिए | दर्दे – दिल आज मेरे मुखालिब रहे | सुखनवर से उन्हें ‘ आशना कीजिए | चांद तक की अदा कुछ सँवर जायेगी | अश्क आंखों से गर आबशा कीजिए | कल्बे – रहबर इनायत बनी गर रहे | चंद – लम्हों में फिर राब्ता कीजिए | मशवरा ये हुकूमत तुम्हीं से लेगी | नौजवानों खड़ा ‘ काफिला कीजिए | जब वरक लफ्ज तेरे आगोश मे हैं | दर... »

जख्म दबाकर मुश्काता हूं

जख्म दबा – कर मुश्काता हूं | चुप रहकर मैं चिल्लाता हूं | मेरी बातें खुल न जाये | बातों से ‘ मैं बहकाता हूं | घर में ‘ आग लगा मत देना | पानी पर मैं चढ़ जाता हूं | मेरी आंखें नोच न लेना | कुछ तो तुमको दिखलाता हूं | गहरी चोटें बोल रही हैं | खुद के खातिर लड़ जाता हूं | तुम सब अपना छोड़ो यारों | झूठा खुद को बतलाता हूं | सारी ख्वाहिश ‘ छोड़ न देना | अरविन्द तुम्हे समझाता हूं | ❥ कुमा... »

हुआ हूं खाक यहां रह गया

हुआ हूँ ख़ाक यहां रह गया ‘ धुआं मेरा | किसी में दम है तो रोको ये कारवां मेरा | सभी ये कहते है अक्सर ज़मीन मेरी है | कोई ये क्यों नही कहता है आसमां मेरा | बदन से रूह तलक मैं ही बस गया तुझमें | मिटायेगा तू कहाँ तक बता निशां मेरा | मेरे लबों से हँसी तू मिटा न पायेगी | ए ज़िन्दगानी ले कितना भी इम्तिहां मेरा | नहीं है खौफ कि दुश्मन जहां हुआ कैसे | कि अब जहां का खुदा खुद है मेहरबां मेरा | कई हज़ार फफो... »

मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार

मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा ) »

मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार

मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा ) »

जो लगे कब्र पे पत्थर है

जो लगे कब्र पे पत्थर हैं बराबर कर दे ऐ खुदा मेरे बराबर मेरी चादर कर दे ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा ) »

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