ज्योति कुमार, Author at Saavan's Posts

काश

ज्योति »

काश

ज्योति »

देखने की आश,

तुझे देखने की आश लगा बैठा हूँ, तुझे पाने की आरजु दिल मे सजा बैठा हूँ,, कौन से दिन आयेगें मिलन की पंडितो से दिखाकर बैठा हूँ।। ज्योति »

उजड़ी।

मेरी उजड़ी हुई घर को बसायेगा कौन, माँ ! जब तु ही नही रही बहु लयेगा कौन। ज्योति »

जिन्नदगी के पन्ने मे।

चल जिन्नदगी के पन्ने मे तेरा नाम लिखता हूँ, तुम्हारे साथ जीने मरने का वादा अदालत मे गीता मर हाथ रख कर कहता हूँ।। ज्योति »

उजड़ी।

मेरे उजड़ी हुई फुलवाड़ी ,(बाग) देखकर मत हँसना यारो,, बागीयो ही ने उजाड़ा है यारो। »

प्यासा ।

नजर प्यासा -प्यासा सा है, तुमहे देखने के लिए,, सुना है तुम्हारी मेहदी रचाने वाली है किसी दुसरे नाम की।। ज्योति »

सपना ।

सपनो तो बहुत देखे थे ,, तुम्हारे हाथ मे हाथ डालकर, तु ही तो खुदगर्ज निकली किसी के हाथ पाने के बाद।। »

काश।

काश अगर मै जानवर से दिल लगाया होता, मेरे साथ भले वो वादे जीने और मरने की नही करती,, लेकिन दुम हिलाया होता।। »

अपनी आँख से

तेरी नसीली आँखो मे बसती है मेरी दुनिया! तु आँखो से आँसु मत बहा। »

Page 1 of 13123»