JYOTI BHARTI, Author at Saavan's Posts

नहीं लगता

अकेली नही हूँ,पर तन्हा तो हूँ, यहाँ हूँ तो सही,पर पता नही कहाँ हूँ। कैसे कहु और किससे कहु , मेरे मन की व्यथा ये। सब कुछ होते हुए भी, क्यों तन्हा हूँ मैं। भीड़ से दुनिया की घिरी हूँ हरदम, अपने और अपना कहने वाले बहुत है। पर क्यों फिर भी कोई  अपना नहीं लगता। कहने को तो चाहते है बहुत, पर कोई सच्चा चाहने वाला नही दिखता। कहने को तो बहुत मुसाफिर है राहो में मेरी, पर मुझे कोई हमसफर क्यों नही लगता।। »

वो कहता था,

वो कहता था ,की सोनिये तेरी आंखां तो काजल जच्चदा सी, फेर मैंने वी पूछ लिया मुझे क्यों रुला कर तू चला गया। मैंने पूछा क्यों चूम जाते हो होंठो को यूँ तुम, वो मरजाना कह पड़ा तेरे होंठो पर लाली जो नही जचदि। मुझे कहता था, तेरी पायल सांस निकाल जाती हैं,तुझसे मिलने पर मजबूर कर जाती है, आज थक गयी में पायल छनका कर,पर आया नहीं तू सुबह से शाम हो गयी। मेरी चूड़ी की खनखन तुझे सताती थी,तुझे हर पल बेचैन कर जाती थी,... »

“शहीदों” की “शहीदी”

हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी का सामान अधिकार हो जायेगा, यकीन मानो उस दिन “शाहिदो” की “शाहीदी” को सलाम हो जायेगा।।।। जिस दिन निर्भया जैसी लडक़ी सरेआम बेआबरू होने से बच जायेगी, उसी दिन मेरे देश की शाहिदो की शाहीदी अमर हो जायेग... »

हम तो…..

हम तो…..

मैं आज भी गमो का क़र्ज़ चुकाते हुए, अपनी सारी खुशियां दाँव पर लगाये बैठी हूँ। कौन कहता है सिर्फ बेवफा होती है औरत, मैं अपनी वफ़ा साबित करने में अपना दामन ,सबकी बातों से छलनी करवाये बैठी हूँ। आज भी इस ज़िन्दगी की दौड़ में खुद पर बाज़ी लगाये बैठी हूँ। कौन कहता है वो बदनाम गालियां बस बदनामी दे जाती है, मैंने तज़ुर्बे के साथ वहाँ से शौहरत को पाते देखा है। मैं उनके गमो को भुलाने के लिए घर से क्या निकली उस दिन... »

आओ रंग लो लाल

आओ रंग ले एक दूसरे को, बस तन को नहीं मन को भी रंग ले…. हर भेदभाव जात-पात को रंग ले धर्म के नाम को रंग ले। मिला ले सबको एक रंग में वो रंग जो है मेरे तेरे प्यार का हर सरहद से पार का धरती से ले कर उस आकाश का रंग दो सबको उस रंग में।। सिर्फ अपना नही उस नन्ही परी का मुँह मीठा कराओ उस गरीब के घर तक भी रंग को पहुचाओ उस माँ के खाली दामन में भी ख़ुशी थोड़ी तुम डाल आओ।। सिर्फ अपनों को नहीं सबको रंग दो हर... »