Jyoti, Author at Saavan's Posts

Aazadi

“आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी, दीवारें कई बार हिली, बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं , गोरों की गुलामी से निकले तो, कुछ दीमक ऐसे लिपट गये, समझ सके ना अर्थ आज़ादी का, ये शब्दों तक ही सिमट गये थे, दोष नही था गैरो का, अपनों से भारत हार गया था, आज़ादी की खुशियों को , बँटवारा ही मार गया था, मख़मल पर जो बैठे थे, वो कब फूलो के पार गये? जिस देशभक्त ने लहू बहाया, वो मरघट के संसार गये, तामस बढ़... »