Janki Prasad (Vivash), Author at Saavan - Page 4 of 6's Posts

पत्र आता

तन वदन मन खिलखिलाता , जब किसी का पत्र आता । पत्र के उर में बसे हैं , प्रेमियों के भाव गहरे । दूर हों चाहे भले वे , पत्र से नजदीक ठहरे । पत्र ही ऐसा सुसेवक , दूरियाँ सबकी मिटाता । बहुत दिन तक जब किसी के , दर्शनों को मन तरसता । मीत की पाती मिले जब , प्यार अंतर में बरसता । प्यार का पानी पिलाकर , प्यास को पल पल बढा़ता। जब कभी आकुल हुआ मन , लेखनी पर दृष्टि जाती । विरह-गाथा कागजों पर , चित्त के रूपक सजा... »

आ गया अब शीत का मौसम

आ गया अब शीत का मौसम कंपकंपी के गीत का मौसम । झील सरिता सर हैं खामोश अब न लहर में तनिक भी जोश वृक्ष की शाखें नहीं मचलें लग रहा अब है न तनिक होश धूप के संगीत का मौसम गर्मियों के मीत का मौसम उमंगों पर है कड़ा पहरा जो जहां पर है वहीं ठहरा किसलिये है भावना वेवश शीत का यह राज है गहरा शीत से है प्रीत का मौसम धूप से विपरीत का मौसम। अधर तक मन का धुँआ आता दर्द का हर छंद दोहराता चुभन की अनुभूति क्या प्यारी आ... »

रहे ना रहे हम

चाहे कुछ भी ना हो दुनिया में, यादें तो हमारी हैं । रंगीन प्रेम गाथा ,हमारी है , तुम्हारी हैं । »

आपकी छवि

सर्दियों में धूप मनको जिस तरह प्यारी लगे । आपकी छवि व्यथित मन को परम सुखकारी लगे । मौन रह.अनकही बातें , शेष कहने को रहीं । जिस जगह से भी गुजरते , आप मिल जाते वहीं । मुसकराहट मन चुराती , कल्पना हो आपकी क्या पता कब याद आएँ , याद बनजारी लगे । दर्द भी कैसा दिया है , अब दवा लगने लगा । आगमन की आस में , मन जागरण करने लगा । द्वार पलकों के न इक पल, बंद हो पाते कभी , चिर प्रतीक्षा की घड़ी , अब ,और भी भारी लग... »

आपकी मुसकान

आपकी मुसकान के आधीन, यह दिल हो चुका । अब नाजा जीते जी कभी भी हो सके आजाद यह । अब इवादत प्यार की , करता रहेगा उम्र भर । इनायत या शिकायत की., करेगा फरियाद यह । »

दिल

किसी का दिल भी , आईने की तरह टूट गया। लाख पुचकार कर जोड़ें, नहीं जुड़ पाएगा । रास्ता जिंदगी का बन गया आड़ा-टेढ़ा , लाख चाहें , नहीं सीधा कभी , मुड़ पाएगा । »

अपलक

अपलक टकटकी लगाकर, देखते ही देखते । जिंदगी कब गुजर जाए, कुछ नहीं इसका पता। »

निगाहों के रस्ते रस्ते

निगाहों के रस्ते रस्ते , प्यार का पैगाम दिल तलक पहुंचे , प्यार की पहली नजर ही प्यार की पहली सीढ़ी है । »

बिखरना फिर सिमट जाना

बिखरना फिर सिमट जाना, इश्के अंजाम होता है । प्यास दिल की बुझाने को , नजर का जाम होता है। »

आपका दर्द

आपका दर्द , दिल को इस कदर, मुझको तो प्यारा है । दर्द की दवा देने में , अपना जीवन गुजारा है । बढ़ीं बैचैनियाँ जब जब., ना तुमको नींद आई है , अपनी रातों को आँखों ने, रतजगा कर गुजारा है । जानकी प्रसाद विवश »

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