Janki Prasad (Vivash), Author at Saavan - Page 3 of 9's Posts

इन्द्र धनुषी-अभिवादन

“**इन्द्र धनुषी-अभिवादन”** *************** मित्रता का महकता रहे चंदन , मित्रता का मन करे हर पल वंदन. । अमर रहें मित्रता के अक्षय कोष मे , जग करे मित्रता का हरपल अभिनन्दन । प्यारे मित्रो , प्यार के चटकीले रंगों के रम्य छटामय सवेरे की मंगलकामनाएँ, सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । आपका अपना मित्र , जानकी प्रसाद विवश जानकी प्रसाद विवश »

**अमर गीत”**

**अमर गीत”** आज कहीं भी नहीं उमड़ती मन से ऐसी पीर । आज कहाँ ढूढें बतलाओ , पीड़ा की जागीर । जानकी प्रसाद विवश »

नित शाखें प्यार की हैं झूमती

“**मित्रता के तख्त पर”** मधुर प्रातः स्मरण “ नित शाखें प्यार की हैं झूमती , हर जिंदगी के. दरख्त पर । हर सुवह शाम की दुआ-सलाम, करते है मित्रता के तख्त पर । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , मधुर सवेरे की हार्दिक मंगलकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

मित्रता

*प्रातः अभिवादन* सुवह सुवह जो मित्रता की ना महक आये । जिंदगी व्यर्थ में , दिन -रात सी चली जाये । चंद लमहे ही सही ,दोस्तों के बीच जियें , जिंदगानी की कहानी नयी लिखी जाये । …… . जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , मुसकराओ , दोस्ती के महकते गुलाबों का साथ निभाओ । …… सपरिवारसहर्ष सवेरे की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

उठो भी यार…

प्यारे मित्रो, रविवारीय आनन्दमय सवेरे की, मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष स्वीकारें। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश “उठो भी यार… देखो एक खुशनुमा सुबह बाँहें फैलाए तुम्हारा ही इंतजार कर रही है, तुम्हारे संग खिलखिलाने और दौड़ते-भागते तुम्हारे हर ख्वाब को पाने का… तो, अब देर मत करो और आ जाओ…” (इट्स माई पर्सनल थिंकिंग टुडे फॉर यू) ✊🔱।। जय भोलेनाथ करना सबका भला ।।🔱✊ »

आपकी खामोशियाँ

प्यारे मित्रो सुप्रभात अभिवादन , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें…. आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश “**आपकी खामोशियाँ “** ************* आपकी खामोशियाँ भी , हर घड़ी हैं बोलतीं , मौन रहकर भी , हृदय के ,भेद सारे खोलतीं । आपके इस मौन से , मन में, उठा भूकंप है , भावनाएँ , घड़ी के पैंडल , सरीखी डोलतीं । जानकी प्रसाद विवश »

मित्र

प्राण से ज्यादा,मित्र हो प्यारे , इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल मैं मिलते , भले मित्र उपहार में । जानकी प्रसाद विवश प्यारे न्यारे मित्रो, सवेरे की पावन मित्रतामय फिज़ा में सपरिवारसहर्ष प्यार-पगी हार्दिक मंगलकामनाएँ मन से स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

जरूरी नहीं

जरूरी नहीं , हम गले ही लगाएँ । जरूरी नहीं ,आप मिलने ही आएँ। अमर प्रेम का ,ऐसा बंधन हमारा, करें याद हम , हम तुम्हें याद आएँ। ******जानकी प्रसाद विवश********** प्यारे मित्रो , पावन प्रेम से ओतप्रोत, मधुर सवेरे की रसीली पावन मंगलमय शुभकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

“**मोह रही मन”**

“**मोह रही मन”** मोह रही मन सभी के फागुनी बयार । शनैः शनेः उभर रहा है सृष्टि का निखार । धडकनें सुवह की सरगमें सुहावनी। भावनाएँ रंगभरी हुईं लुभावनी । कामनाओं पर चढ़ा छटा काअब खुमार । ,”**प्रातः अभिवादन “** प्यारे मित्रो , सपरिवारसहर्ष फागुनी सवेरे की उमंगों से भरे हर पल की शुभकामनाएँ स्वीकार करें । सविनय आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

जानता है दिल…

आपकी ख्बाहिसों को पूरा करना जानता है दिल, चले आओ सजा लें हम किसी दिन, स्वप्न की महफिल । जानते हैं सभी, सपनों को इक दिन, टूटना पड़ता, टूटता तन, टूटता मन, छूट जाती है, हर मंजिल । जानकी प्रसाद विवश »

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