Janki Prasad (Vivash), Author at Saavan - Page 2 of 6's Posts

भावना-साग

“* भावना-सागर”* ********* भावनाओं से बँधा संसार है , भावना के बिना , झूठा प्यार है । भावनाओं में अमर विश्वास है , भावना की तरी , बेड़ा पार है । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , सवेरे की प्रेरक भोर में सपरिवारसहर्ष मंगलकामनाएँ सहर्ष स्वीकार करें । सविनय , आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

प्राण से प्यारे गणतंत्र

प्राण से प्यारे गणतंत्र, पल पल कोटि कोटि प्रणाम। “**फूली नहीं समाती,** छब्बीस जनवरी। खुशियों के गीत गाती छब्बीस जनवरी । गांधी भगत बिस्मिल , आजाद बोस की, कुर्बानियाँ सुनाती , छब्बीस जनवरी । रक्षा करने स्वदेश की , हँसते हँसते सर्वस्व लुटाते हैं । उन अमर शहीदों को , स्वदेशवासी श्रद्धानत होकर शीष झुकाते हैं। देशवासियों को शुभकामनाएँ, बधाइयाँ। सविनय, आप सभी का मित्र जानकी प्रसाद विवश »

दोस्ती

दोस्ती का अजब सा किस्सा है दोस्त जीवन का अहम हिस्सा है । स्वार्थ का नामोनिशाँ तक है नहीं , जन्म जन्मों का अमर रिश्ता है । प्रिय मित्रों वसंती सवेरे की सरस. घड़ियों में सपरिवारसहर्ष ,मंगलकामनाएँ सहर्ष स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

देख लिया

“**देख लिया”** ****** डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का सपरिवारसहर्ष हार्दिक अभिवादन., हर पल मंगलकामनाएँ स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

वसंतोत्सव-अभिनन्दन

“**वसंतोत्सव-अभिनन्दन”** ******^^^****** कोयल के स्वर पड़े सुनाई , यह वसंत बेला सुखदायी । मधुऋतु में , माधुर्य पगा है, जीवन का हर क्षण । …..जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो वसंत पंचमी के ऋतु पर्व पर सपरिवारसहर्ष ,हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

तेरी इक मुसकराहट पर बहारें

“**प्रात:अभिवादन”** ****^^^^*** तेरी इक मुसकराहट पर बहारें लौट आती हैं । तेरी इक मुसकराहट पर बहारें , गुल खिलाती हैं । महक जाता है तन मन और हर उजड़ा हुआ उपवन , प्यार की वसंती रितु , जिंदगानी गुनगुनाती है । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो, प्यार बरसाते सुखद सवेरे की प्यार भरी मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । जानकी प्रसाद विवश »

खूँटी और दीवार

आपके-गीत-क्रमांक-20- दिनांक-16 -01-2018 खूँटी और दीवार गीतकार-जानकी प्रसाद विवश साथ तुम्हारा मेरा…साथ तुम्हारा मेरा जैसे खूँटी ओर दीवार का। साथ हुआ है जिस पल से भी, हम दोनों ही साथ रहे। अपनी भार वहन क्षमता से, बढ़चढ़ कर हैं भार सहे। कभी उखड़ना फिर ठुक जाना अपनी तो है नियति रही, नहीं अपेक्षा रही तनिक भी कभी कोई आभार. कहे। खूब समय की लीला देखी बन गुम्बद मीनार का। टूटे जब भी ,छोड़ गये, टूटन के अमिट... »

सवेरे की मधुर मुसकान का

सवेरे की मधुर मुसकान का अर्चन करें मन से । उजाले की अमर पहचान का , वंदन करें मन से । मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन, निराला है , नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा सकल तन मन से । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , महिमामय सवेरे की अशेष मंगलकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार. करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

प्राण से ज्यादा , मित्र हो प्यारे

प्राण से ज्यादा, मित्र हो प्यारे, इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल मैं मिलते , भले मित्र उपहार में । जानकी प्रसाद विवश प्यारे न्यारे मित्रो, पावन मित्रतामय फिज़ा में सपरिवारसहर्ष प्यार-पगी हार्दिक मंगलकामनाएँ मन से स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

मेरे मित्र देवता हैं

जीवन के खत पर लिखा वो पता हैं , मेरे मित्र ,मेरे लिए , देवता हैं। धड़ी चाहे सुख की, या हो चाहे दुख की, किसी पल नहीं वे , हुए लापता हैं । जीवन में भरते हैं , रिश्तों के मेले , मेरे मित्र ,मेलों की चिर भव्यता हैं । इनके प्रमाणन की कब है जरूरत चुनौती रहित ,इनकी सर्वज्ञता हैं । »

Page 2 of 61234»