Janki Prasad (Vivash), Author at Saavan - Page 2 of 9's Posts

भेद खोल दिया

“**भेद खोल दिया”** ^^^^^^^^^^^^^ भेद पायल ने दिल का खोल दिया , घुघरुओं ने भी क्या क्या बोल .दिया । बेखुदी बेसुधी तन मन की, सारी लाँघ गई , प्यार ने जिंदगी को , प्यारा सा , माहौल दिया । जानकी प्रसाद विवश »

गुणों की महक

प्रातः अभिवादन “**गुणों की महक”** ***?**?**?? गुणों के गुलों की महक गुदगुदाए , गुणों की महक ,जिंदगी महक जाए। लगाएँ नयी पौध नित , सदगुणों की , वसंत आए ,आकर कभी भी न जाए। ******जानकी प्रसाद विवश ****** सभी प्यारे मित्रों को , गुणी सवेरे की , प्यार भरी शुभकामनाएँ…। सपरिवारसहर्ष स्वीकार कर अनुगृहीत करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

जिंदगी

“”**जिंदगी”** ***** खुश रहकर गुजारो, तो मस्त है जिदंगी, दुखी रहकर गुजारो, तो त्रस्त है जिंदगी, तुलना में गुजारो, तो पस्त है जिंदगी, इतंजार में गुजारो, तो सुस्त है जिंदगी, सीखने में गुजारो, तो किताब है जिंदगी, दिखावे में गुजारो, तो बर्बाद है जिदंगी, मिलती है एक बार, प्यार से बिताओ ये जिदंगी, जन्म तो रोज होते हैं, यादगार बनाओ ये जिंदगी!! आपकी जिंदगी खुशियों भरी हो मधुर सवेरे की मंग... »

सावधान हों

“**सावधान हों”** ****** सावधान होकर रहें , विपदा- शूली राह । आतुरता करती सदा , जीवन भर गुमराह।। अजी सब सावधान हों , नहीं व्यवधान कोई हो । *********जानकी प्रसाद विवश ****** * प्राण से प्यारे मित्रो, प्यार बरसाते सवेरे की मधुर मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष स्वीकार करने की कृपा करें। सादर, सविनय आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

प्यार के गीत

रोज प्यार के गीत गुनगुनाए हर कोई मन , मुसीबतों को ,सबक सिखाए हर कोई मन। नाच ले ,झूम ले मस्ती भरे , मधुर तरानों पर, खुशियों की बाँहों में ,झूल जाए हर कोई मन । ^^ जानकी प्रसाद विवश^^ »

तेरी तस्वीर

तेरी तस्वीर के आगे यह दुनिया कुछ भी नहीं है । जो भी देखेगा तुझे देखकर, दीवाना हो जायेगा । »

जिन्हें याद करके

“**जिन्हें याद करके “** मंगलकामनाएँ ************ जिन्हें याद करके , हृदय नाच उठता, नहीं और कोई , वे हैं मित्र मेरे । हर इक दुख और सुख में , सदा साथ रहते , करें एक दूजे के हरपल , दिल में बसेरे । कभी भी न छू पाए , स्वारथ की परछाँई , चाँद सूरज से हैं मित्र , डरते हैं अँधेरे । जिन्हें याद करके, हृदय नाच उठता , मेरे मित्र हैं चमचमाते सवेरे । प्यारे मित्रो , सपरिवारसहर्ष मित्रतामय सवेरे की म... »

प्रातः अभिवादन

“**प्रातः अभिवादन “** *********** मित्रतामय जगत सारा , मित्रता ही महकती है । गुलाबों की तरह हर पल दुख के शूलों के संग रहती। निभा कर साथ, सुख दुख में , मित्र के सुख दुख को सहती। हर इक जीवन -परीक्षा में , मित्रता याद आती है । प्यारे मित्रो , सपरिवारसहर्ष मधुर सवेरे की उमंगों से भरे हर पल की शुभकामनाएँ स्वीकार करें । सविनय आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश, »

मित्रता के तख्त पर

**मित्रता के तख्त पर”** मधुर प्रातः स्मरण ” नित शाखें प्यार की हैं झूमती , हर जिंदगी के. दरख्त पर । हर सुवह शाम की दुआ-सलाम, करते है मित्रता के तख्त पर । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , मधुर सवेरे की हार्दिक मंगलकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

सुप्रभाती-नमन

सुप्रभाती-नमन दुआओं की दवाओं ने, वह असर दिखला दिया। दस दिनों की जगह, दो दिन में ही अंतर ला दिया। जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो, गुनगुनाती सुवह का रसीला नमन, सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । सादर सविनय । आपका अपना मित्र जानकीप्रसाद विवश »

Page 2 of 91234»