Janki Prasad (Vivash)'s Posts

सवेरे की मधुर मुसकान का

सवेरे की मधुर मुसकान का अर्चन करें मन से । उजाले की अमर पहचान का , वंदन करें मन से । मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन, निराला है , नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा सकल तन मन से । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , महिमामय सवेरे की अशेष मंगलकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार. करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

प्राण से ज्यादा , मित्र हो प्यारे

प्राण से ज्यादा, मित्र हो प्यारे, इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल मैं मिलते , भले मित्र उपहार में । जानकी प्रसाद विवश प्यारे न्यारे मित्रो, पावन मित्रतामय फिज़ा में सपरिवारसहर्ष प्यार-पगी हार्दिक मंगलकामनाएँ मन से स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

मेरे मित्र देवता हैं

जीवन के खत पर लिखा वो पता हैं , मेरे मित्र ,मेरे लिए , देवता हैं। धड़ी चाहे सुख की, या हो चाहे दुख की, किसी पल नहीं वे , हुए लापता हैं । जीवन में भरते हैं , रिश्तों के मेले , मेरे मित्र ,मेलों की चिर भव्यता हैं । इनके प्रमाणन की कब है जरूरत चुनौती रहित ,इनकी सर्वज्ञता हैं । »

डूबकर देख लिया

डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का सपरिवारसहर्ष हार्दिक अभिवादन., हर पल मंगलकामनाएँ स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

भोर का अभिवादन

भले वक्त में तो सभी ,नित अपनत्व लुटाए , बुरे बक्त , परछांई भी , दूर दूर न दिखाए। जानकी प्रसाद विवश आदरणीय प्यारे मित्रो, सवेरे की मधुर छटा में आप सभी का हार्दिक अभिवादन सपरिवारसहर्ष स्वीकारें । आपका हर पल मंगलकामय हो। आपका अपना मित्र जानकी प्यारा मित्र »

शीत के सबेरे में

शीत के सबेरे में , मित्रता की गर्माहट, प्यार मोहब्बत के सूरज की, सुनकर आहट , भावों के पंछी चहक उठते । अंगुलिया ठिठुर जाएँ , भावना उनींदी सी , प्यार के गरमागरम संदेश मगर लिखती हैं । – जानकी प्रसाद विवश »

सुखद है मित्रों का संसार

सुखद है मित्रों का संसार , बरसता निशदिन प्यार अपार। नहीं भौतिक है, है अध्यात्म , मित्र की महिमा अपरंपार । – जानकी प्रसाद विवश »

प्यारे मित्रो

प्यारे मित्रो….. नाचो -गाओ मन, नव-गीत गुनगुनाना , नये वर्ष खुशी खुशी ,सबके मन बहलाना । जन जन का मन से ,यह नम्र निवेदन है , मन की पीड़ा का , प्रस्तुत आवेदन है । मन का उल्लास कबसे, आहत होकर बैठा , कटु अनुभव का , भारी भरकम प्रतिवेदन है । उम्मीदों के शातिर-कातिल जैसे बनकर , जन गण के रोते मन, और मत रुलाना । गड़े हुए मुर्दे, उखड़ते भी देखे हैं , बडे़ बडे़ घोटाले वाले भी लेखे हैं । अर्थव्यवस्था की साँ... »

अभिवादन

मित्र अपना यह अभिवादन , बहुत मन को सुहाता है । आँख जैसे ही खुलती है , तुम्हारा ध्यान आता है । मै ईश्वर से भी पहले ,बस तुझे ही याद करता हूँ , तू जीवन के अँधेरों में , मुझे रस्ता दिखाता है । ****जानकीप्रसाद विवश ** »

सवेरे

सवेरे ही सवेरे हों ,मुसीबत के अंधेरे में , मित्रता-सूर्य की किरणें ,बिखर जाएं, अंधेरे में। जानकी प्रसाद विवश »

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