Brijmohan Swami, Author at Saavan's Posts

हैरानी सारी हमें ही होनी थी – बृजमोहन स्वामी की घातक कविता।

हैरानी कुछ यूँ हुई कि उन्होंने हमें सर खुजाने का वक़्त भी नही दिया, जबकि वक़्त उनकी मुट्ठियों में भी नही देखा गया, लब पर जलती हुई सारी बात हमने फूँक दी सिवाय इस सिद्धांत के कि हमने सपनों की तरह आदमी देखे, जबकि ‘सपने’ किसी गर्भाशय में पल रहे होते तो सारे अल्ट्रासाउंड घड़ियों की तरह बिकते और हम वक़्त देखने के लिए सर फोड़ते, मेहँदी की तरह लांछन लगाते, सिगरेटों की तरह घर फूंकते, कुत्तों की तरह ... »

ओम पुरी जिन्दा है – बृजमोहन स्वामी

चलाओ टीवी, भिन्डी काटती हुई अंगुली का पसीना न पोंछते हुए प्रेमिका को मिलाओ फोन, बांटों दुःख ओम पुरी चले गए, सुनाओ निःशब्द रो लो तीन सौ आँसू लिखो डायरी में, बदलो तस्वीरें और बताओ खुद को इतना खरा आदमी था कि मौत में बीमारी या दर्द की मिलावट नहीं की ऐसे आदमी को कैसे याद किया जा सकता है, शायद उनकी पिछले सालों की बुरी फिल्में देख कर? काटो तो खून, न काटो तो वक़्त इंसान बस उतना ही होता, जितना वह छोड़कर जात... »