Haseen ziddat, Author at Saavan's Posts

“मुझे राहत बन जाना हे”

“मुझे राहत बन जाना हे”

उल्झे हुए रास्तो से, मुझे अंजाम तक जाना हे, मंज़िल ना जाने कहा गुम हे, ना जाने किस राह गुज़र जाना हे.. मे थका हारा दर ब दर, पाओं मे भी चुभन सी हे, हाल ए गरदिश का साया, सांसे भी अब सहम सी हे! रुकना ठहरना अब बस मे नही, मुझे गरदिशो को पार लगाना हे, करके समझौता पेरो के छालो से, खुद को रूहानी बेदाग बनाना हे..! मेरे अहसास मेरे जज़्बात, करेगे तज़किरा इक दिन, करुगा तज़किरा इक रोज़, मेरी मासूम सी ख्वाहिशो का.! स... »

खून का बदला

खून का बदला

तुम जब जब गिराओगे लाशें मैं तब तब ज़िंदा हो जाऊंगा, शक्ल बदलेगी मगर तुम्हें हर शय मे, मैं ही नज़र आऊंगा l     मैं सपूत हूं उस मां का जिसकी मिट्टी ही मेरा गुरूर है, दफ्न होकर उस मिट्टी में मैं मर के भी अमर हो जाऊंगा l     सुनो ऐ जवानो!, मेरी शहादत को तुम यूं ज़ाया ना जाने देना, मैं जो लडाई छोड़कर गया हूं उसे अंजाम तक पहुंचा देना l     वो नामर्द पीठ पीछे ही वार करना जानते हैं, तुम सामने छाती ठोक उनकी उ... »