Dev Kumar, Author at Saavan's Posts

ओ बेवफा…….

ताजुब नहीं मुझे तेरे बदल जाने से ओ बेवफा के कुछ लोग बदल नहीं सकते फितरत-ऐ-दिल अपना………….!! D K »

खूब किया…….

अपनी मोहोब्बत का हमने तमाशा भी खूब किया एक बेवफा ने हमको इश्क़ मे बेहताशा भी खूब किया सोचा था मर कर अब हम किधर जाएंगे, मगर उस बेवफा ने काम-ऐ-दिलासा भी खूब किया……………….!! D K »

इंसा, इंसा को क्या देता है…….

इंसा, इंसा को क्या देता है जख्म और सिर्फ दगा देता है पिला कर घूँट धोके का सबको ये बड़े आराम से सबको सुला देता है करता है विश्वास घात चंद रुपयों के खातिर दिल के रिश्तों को ये क्या सिला देता है बना लिया है इस ने रुपयों को खुद अपना इंसानियत को तो अब वो बहा देता है बागबानी करता है, झूठ के बीज बो कर धोके का फूल वो खिला देता है कोई हाल-ऐ-दिल अपना सुनाये कैसे किसी को हर कोई अब झूठा दिलासा दिला देता है दोस... »

जैसे रहता हो समुन्दर तन्हा, किनारों की तरह…….

पहली मोहोब्बत का तकाज़ा क्या करे हम वो मिला था हमको बहारों की तरह दीवानगी इस से बढ़ कर और क्या होगी हमने चाहा था उसको तलबगारों की तरह खता क्या हुई एक छोटी सी हम से वो हमें देखने लगा गुनाहगारों की तरह के ज़िन्दगी जी हमने तब से खानाबदोशों जैसे और रहने लगे हम बंजारों की तरह इस शहर से उस शहर, इस नगर से उस नगर छुपते रहे बस हम पनाहगारों की तरह गमो ने ज़िन्दगी मे जगह बना ली इस कदर भी के खुशियां रह गई महज़ ज़िन... »

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर सब देखते है इनको शक की नज़र से कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यू... »

Love……

                 Love I find myself, in love, waste I thought, love is, totally waste But someone told me, it is nice By which, every human become wise It includes sorrow, reliance & emotion That is why it is found in every relation It makes our life as like a heaven It is very innocent, not a clever Once again when I thought on it Then I found truthiness in it That was not my fault, I said De... »

इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब……

अपनी इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब बस इतना था साहिब मांग बैठे थे खुदा से वो चीज़, जो बहुत अज़ीज़ थी खुदा के लिए…………!!                                                                             …………………D K »

ऐ खुशियां…….

ऐ खुशियां अब तो लौट आ तू मेरी ज़िन्दगी में सुलह कर करके के अब न वो रहा, न उसकी यादें, और न कोई बहाना इस दिल का…………!!                                    ……………..D K »

हाल-ऐ-दिल……..

कही तन्हा न कर दे तुझे, ये आदत तन्हा रहने की रातों को अपना हाल-ऐ-दिल तू चाँद, तारो से कह दिया कर……………….!!                                          ………………D K »

सारे मौसम रो रहे है………

इस बारिश के रुकने का इंतज़ार न करना तुम आज हमने पीया है गम-ऐ-आंसू, सारे मौसम रो रहे है……………..!!                                                              …………………D K »

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