Dilip, Author at Saavan's Posts

बाबुजी की याद में…..

*ओ बाबुजी…* बहुत याद आते हो ओ बाबूजी दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।। जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।। अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें अंधेरी है खुशियां ओ बाबुजी।। रोता है सूरज पूरब सुबह से अश्क़ों में डूबे दिन ओ बाबुजी।। घर की दीवारें आसमा सितारे क्षितिज तक है सुबकन ओ बाबुजी।। नींद और निवाले भी दुश्मन हुए सांस भी खिलाफत में ओ बाबूजी।। सुबह के अज़ान और प्रभु आरती कुछ भी न... »

नए साल की नई कविता

एक नई कविता”अंग्रेजी न्यू ईयर”के आगमन पर …समर्पित (डा0दिलीप गुप्ता,घरघोड़ा.रायगढ़.छ0ग0) 0 **स्वागत हे नव वर्ष क्या लेकर आए हो.. विषाद की बोरियां या बिंडलों मे हर्ष !! या ओढ़कर भेंड़ की खाल आये हो !! समस्याओं की नई “जाल”लाए हो !! 0 हे नए साल न आना जुबान से कंगाल… मीठलबरा,बेशरम कर जोरे खड़े हो जाते हो दांत निपोरे… झूठे आश्वासन औ वादे न दे जाना.. दे के भाषण ,गरीबो... »