देवेश साखरे 'देव', Author at Saavan's Posts

दौर आ चला है

देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। वादों की फेहरिस्त तो, फिर से लंबी हो चली, इरादों को समझने समझाने का दौर आ चला है। बरसों से निशां पे फ़ना हैं, कुछ एक नादां मुरीद, शख्सियत पे बदलाव लाने का दौर आ चला है। वहां रसूख़दारों की मिलीभगत, पूरे ज़ोरों पर है, यहां दोस्तों के लड़ने लड़ा... »

मैं जाम नहीं

छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा लो, पीछे हटाता गाम नहीं। तुमको माना देवकी, मुझ ‘देव’ की, पर अफसोस है, की मैं राम नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ 1.गाम- कदम »

तारीफ़ तेरी

तारीफ़ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है । इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है । माना बरसों पुराना, इश्के-फसाना हमारा, पर आज भी, इश्के-मिसाल जहां करती है । एक तेरे सिवाय, नहीं कोई और जिंदगी में, शक मुझ पर, बेवजह, ख़ामख़ाह करती है । कल के लिए, हम अपना आज ना खो दें, कल का फैसला, जिंदगी की इम्तहां करती है। देवेश साखरे ‘... »

नक़ाब

नक़ाब से जो चेहरा, छिपा कर चलती हो। मनचलों से या गर्द से, बचा कर चलती हो। सरका दो फिर, गर जो तुम रुख से नक़ाब, महफिल में खलबली, मचा कर चलती हो। तेरे आने से पहले, आने का पैगाम आता है, पाज़ेब की छन – छन, बजा कर चलती हो। तेरी एक दीद को, तेरी राह पे खड़ा कब से, तिरछी नज़रों से दीदार, अदा कर चलती हो। डसती है नागिन सी, तेरी बलखाती गेसू, पतली कमर जब, बलखा कर चलती हो। देवेश साखरे ‘देव’ »

नारी शक्ति

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की, समस्त महिलाओं को ससम्मान शुभकामनाएँ, छोटी सी रचना के माध्यम से प्रेषित है – नारी में शक्ति है, नारी से भक्ति है, यह वस्तु नहीं मात्र उपभोग की। नारी रूप बलिदान, कन्यादान महादान, घर हो जिनके बेटी, बात है संजोग की । नारी से सृष्टि है, ममता की वृष्टि है, नहीं कोई किमत माँ के कोख की । नारी समर्पण है, प्रेम का दर्पण है, नहीं कोई पर्याय पत्नी के सहयोग की। देख कर सूनी कल... »

शहीदों को नमन

नमन आज़ादी के परवानों का। वंदन क्रांति वीर जवानों का।। भगत, सुखदेव क्रांति वीरों के, इंक़लाब का डंका बजता था। ‘तिलक’ के विचारों का तिलक, राजगुरु के भाल सजता था। आज़ाद भारत का सपना, दिलों में इनके बसता था। स्वराज के अधिकार को पाना, ख़्वाब आज़ादी के अरमानों का। नमन आज़ादी के परवानों का। वंदन क्रांति वीर जवानों का।। अंग्रेजी हुकूमत हिला डाली, क्रांतिकारियों की टोली। फिरंगी डर से कांपते, स... »

तुम पर एक ग़ज़ल लिखूं

तुम्हें गुलाब लिखूं या फिर कंवल लिखूं। जी चाहता है तुझ पर एक ग़ज़ल लिखूं। गुल लिखूं, गुलफ़ाम या लिखूं गुलिस्तां, या फिर तुम्हें महकता हुआ संदल लिखूं। तन्हाई छोड़ बना लूं तुम्हें शरीक-ए-हयात, ज़िंदगी के पन्ने पर ये हॅसीन पल लिखूं । ज़िंदगी तुम्हारे नाम लिख तो दी है ‘देव’, तुम्हें अपना आज लिखूं, अपना कल लिखूं। देवेश साखरे ‘देव’ »

जुल्फ़ों की छांव

सुकूने-तलाश में भटकते, कई नगर कई गांव मिले। आरज़ू है बस यही, तेरी जुल्फ़ों की छांव मिले। तेरे इंतज़ार में, कई ज़ख्म लिए बैठा मैं दिल में, या रब ना अब, जुदाई का और कोई घाव मिले। तुम जो मिले जीने की तमन्ना फिर जाग उठी, जैसे किसी डुबते को, तिनके की नाव मिले। यही वक्त है, दुनिया कदमों में झुकाने की ‘देव’ फिर ना कहना कि, बस एक और दांव मिले। देवेश साखरे ‘देव’ »

आतिशबाज़ी का नज़ारा

दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है। नेस्तेनाबूत आतंकियों का ठिकाना है।। क्या सोचा, कुछ भी कर बच निकलोगे, घर में घुसकर मारना आदत पुराना है। दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है।। आतिशबाज़ी का नज़ारा देखा तो होगा, हमारा लोहा तो सारे संसार ने माना है। दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है।। बारूद से अब बहुत खेल लिया तुमने, उसी बारूद से तुम्हारा घर जलाना है। दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है।।... »

हम वह नशा हैं

हम वह नशा हैं, जो कहीं बिकते नहीं। जिसे लत लग जाए तो फिर छुटते नहीं। कीमत मेरी तो फकत प्यार ही है दोस्तों, लगा लो लत, दस्तकस कहीं रुकते नहीं। दुनिया में कोई कमी नहीं, नशे की दोस्तों, प्यार से बढ़कर नशा, कहीं मिलते नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ »

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