दीपक पनेरू, Author at Saavan's Posts

सावन की बूंदों से

रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I  कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता है, कोई लिए कलम और लिख डाले सब कुछ, कोई भूल सा जाता है I  सावन का मन भावन मौसम, हर तन भीगा जाता है, झींगुर, मेढक करते शोरगुल, जो सावन गीत कहलाता है I  हरियाली से मन खुश होता, तन को मिलती शीत बयार, ख़ुशी ऐसी मिलती सब को, जैसे मिल गया हो बिछड़ा यार I  ... »